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चेन्नई।तमिलनाडु की राजनीति में फिल्मी सितारों और सियासी दलों का रिश्ता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अभिनेता **धनुष** के राजनीति में उतरने की अटकलों के बीच सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK के प्रमुख रणनीतिकार और मुख्यमंत्री **थलपति विजय** के करीबी माने जाने वाले **आधव अर्जुन** को लेकर विपक्षी DMK ने बड़ा तंज कसा है। DMK के संगठन सचिव आरएस भारती ने दावा किया कि अगर धनुष नई राजनीतिक पार्टी बनाते हैं तो उसमें सबसे पहले शामिल होने वालों में आधव अर्जुन होंगे।
आरएस भारती की टिप्पणी इसलिए चर्चा में है क्योंकि आधव अर्जुन को विजय के भरोसेमंद सहयोगियों और प्रमुख रणनीतिकारों में गिना जाता है। DMK नेता ने उनके पुराने राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वह पहले भी अलग-अलग दलों के साथ रहे हैं और समय के साथ राजनीतिक ठिकाना बदलते रहे हैं। हालांकि यह DMK की राजनीतिक टिप्पणी और आरोप है, आधव अर्जुन की ओर से धनुष के साथ जाने की कोई घोषणा नहीं हुई है।
धनुष का नाम लेकर DMK ने कसा तंज
DMK के संगठन सचिव आरएस भारती एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने आधव अर्जुन पर निशाना साधा।
उन्होंने धनुष की संभावित राजनीतिक एंट्री की चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सुनने में आ रहा है कि धनुष राजनीतिक पार्टी शुरू कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो उस पार्टी में सबसे पहला हस्ताक्षर आधव अर्जुन का होगा।
DMK नेता की यह टिप्पणी सीधे तौर पर आधव अर्जुन की राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठाने वाली थी। इसके जरिए उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की कि अगर तमिलनाडु में कोई नया प्रभावशाली फिल्मी चेहरा राजनीतिक पार्टी बनाता है तो अर्जुन मौजूदा TVK नेतृत्व का साथ छोड़ सकते हैं।
हालांकि इस बयान को किसी वास्तविक राजनीतिक घटनाक्रम की पुष्टि नहीं माना जा सकता। फिलहाल धनुष ने नई पार्टी बनाने की घोषणा नहीं की है और न ही आधव अर्जुन ने TVK छोड़ने का कोई संकेत दिया है।
कौन हैं आधव अर्जुन?
44 वर्षीय आधव अर्जुन तमिलनाडु की मौजूदा राजनीति में तेजी से उभरे चेहरों में शामिल हैं। उन्हें मुख्यमंत्री विजय के करीबी सहयोगी और TVK के महत्वपूर्ण रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है।
उनका राजनीतिक सफर अलग-अलग संगठनों से होकर गुजरा है। वह पहले DMK से जुड़े रहे। इसके बाद विदुथलाई चिरुथैगल काची यानी VCK के साथ गए और फिर विजय की TVK में शामिल हो गए।
इसी पुराने राजनीतिक सफर को आधार बनाकर आरएस भारती ने उन पर हमला किया है। भारती ने आरोप लगाया कि अर्जुन मौसम की तरह राजनीतिक दल बदलते हैं।
DMK नेता का कहना था कि आधव अर्जुन ने उनके दल में रहते हुए राजनीतिक प्रशिक्षण लिया और बाद में दूसरी पार्टी में चले गए। इसके बाद वह VCK प्रमुख थोल थिरुमावलवन के साथ जुड़े और वहां से निकलकर विजय की TVK में पहुंच गए।
इन टिप्पणियों को DMK और TVK के बीच चल रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
विजय के बेहद करीबी माने जाते हैं अर्जुन
आधव अर्जुन का नाम इसलिए ज्यादा सुर्खियों में है क्योंकि वह कोई सामान्य TVK नेता नहीं माने जाते। पार्टी की रणनीति और राजनीतिक अभियान में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
विजय के अभिनेता से राजनेता बनने के सफर के बाद TVK को तमिलनाडु में एक मजबूत राजनीतिक ताकत बनाने की रणनीति में अर्जुन प्रमुख चेहरों में रहे हैं। ऐसे में DMK ने उन्हीं की निष्ठा पर सवाल उठाकर सीधे विजय के राजनीतिक खेमे को निशाने पर लेने की कोशिश की है।
यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी इस बयान को 'विजय को करीबी सहयोगी से झटका लग सकता है' जैसे राजनीतिक दावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल इसके समर्थन में कोई तथ्य नहीं है कि आधव अर्जुन TVK छोड़ने वाले हैं।
लेकिन अचानक धनुष की राजनीति में एंट्री की चर्चा क्यों?
इस पूरे राजनीतिक तंज की पृष्ठभूमि में अभिनेता धनुष का एक हालिया भाषण है।
जुलाई में चेन्नई में धनुष के फैन क्लबों की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में अभिनेता ने अपने समर्थकों को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एकजुट होना अपने आप में एक शक्ति है और इस शक्ति को कोई उद्देश्य दिया जाना चाहिए।
धनुष ने अपने प्रशंसकों से कहा कि वे केवल फिल्मों के ऑडियो लॉन्च, समारोह या दूसरे आयोजनों तक सीमित न रहें बल्कि अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंद लोगों की पहचान करें और उनकी मदद करें।
उन्होंने समर्थकों से स्थानीय स्तर पर सामाजिक और कल्याणकारी गतिविधियों में ज्यादा सक्रिय होने की अपील की।
यहीं से उनके राजनीति में आने की अटकलें तेज हो गईं।
विजय के पुराने मॉडल से होने लगी तुलना
धनुष के इस कदम की तुलना तुरंत थलपति विजय के राजनीतिक सफर से होने लगी।
विजय ने भी राजनीति में औपचारिक प्रवेश करने से काफी पहले अपने फैन क्लब नेटवर्क को सामाजिक गतिविधियों की तरफ मोड़ा था। उनके प्रशंसक संगठन रक्तदान, भोजन वितरण, शिक्षा सहायता और स्थानीय जनसेवा जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय हुए थे।
इसके बाद विजय ने धीरे-धीरे अपने संगठनात्मक नेटवर्क को राजनीतिक रूप दिया।
धनुष द्वारा भी अपने प्रशंसकों से स्थानीय जरूरतों को पहचानकर समाजसेवा करने की अपील के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगा कि क्या वह भी विजय के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।
नया झंडा आने के बाद अटकलें और तेज
धनुष के फैन एसोसिएशन के लिए नया झंडा सामने आने के बाद इन चर्चाओं को और हवा मिली। इसके साथ ही अभिनेता की सामाजिक गतिविधियों में बढ़ती दिलचस्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
धनुष की ओर से स्कूल भवन के लिए आर्थिक सहयोग जैसी परोपकारी गतिविधियों ने भी प्रशंसकों के संगठित नेटवर्क को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है।
हालांकि धनुष के खेमे की ओर से इन गतिविधियों को सामाजिक कार्य बताया गया है और राजनीतिक पार्टी बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना कि धनुष राजनीति में आने वाले हैं या पार्टी बनाने जा रहे हैं, केवल अटकल होगी।
DMK ने इसी चर्चा को बनाया हथियार
तमिलनाडु में धनुष की राजनीतिक एंट्री को लेकर जारी अटकलों को DMK ने अब TVK के खिलाफ राजनीतिक हथियार बना लिया है।
आरएस भारती ने धनुष के नाम का इस्तेमाल करते हुए आधव अर्जुन के पुराने दल-बदल को निशाने पर लिया। उनका तर्क था कि अर्जुन पहले DMK से VCK और फिर TVK पहुंचे हैं, इसलिए अगर एक नया राजनीतिक विकल्प सामने आता है तो वह फिर पार्टी बदल सकते हैं।
भारती ने आधव अर्जुन को लेकर कई तीखी टिप्पणियां भी कीं और VCK के साथ उनके पुराने रिश्ते पर हमला बोला।
ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं और इनके आधार पर अर्जुन की भविष्य की रणनीति को निश्चित नहीं माना जा सकता।
तमिलनाडु में फिल्म और राजनीति का पुराना रिश्ता
धनुष की संभावित राजनीतिक एंट्री की छोटी-सी चर्चा भी तमिलनाडु में इतनी बड़ी राजनीतिक बहस इसलिए बन जाती है क्योंकि राज्य में सिनेमा और राजनीति का रिश्ता दशकों पुराना है।
एमजी रामचंद्रन यानी MGR से लेकर जयललिता तक तमिल सिनेमा से आए नेताओं ने राज्य की राजनीति में शीर्ष मुकाम हासिल किया। विजयकांत ने भी सिनेमा की लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदलकर DMDK खड़ी की थी।
अब विजय ने भी अपने विशाल प्रशंसक नेटवर्क को संगठित राजनीतिक ताकत में बदला है।
ऐसे में जब धनुष जैसे लोकप्रिय अभिनेता अपने फैन क्लबों को सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय होने का संदेश देते हैं तो स्वाभाविक रूप से उसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगते हैं।
विजय की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा पर भी सियासत
इस बीच विजय को लेकर एक अलग राजनीतिक बहस भी चल रही है। TVK के कुछ नेताओं और समर्थकों ने उन्हें 2029 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में पेश करना शुरू किया है।
हालांकि सहयोगी कांग्रेस की नेता थरहाई काथबर्ट ने इस अभियान को TVK कार्यकर्ताओं और विजय के प्रशंसकों के उत्साह से जोड़ते हुए कहा कि विजय ने राहुल गांधी को INDIA गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर चुना है।
वहीं TVK के सहयोगी वाइको ने भी विजय को प्रधानमंत्री बनाने की मांग पर सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जो मन में आए वह नहीं बोलना चाहिए।
इससे पता चलता है कि विजय की बढ़ती राजनीतिक ताकत के साथ उनके सहयोगियों और विरोधियों के बीच भविष्य की राजनीति को लेकर खींचतान भी शुरू हो चुकी है।
क्या सच में विजय को धोखा देंगे आधव अर्जुन?
फिलहाल इसका जवाब है—**ऐसा कोई प्रमाण नहीं है।**
आधव अर्जुन ने TVK छोड़ने या धनुष के साथ जाने की घोषणा नहीं की है। धनुष ने भी राजनीतिक पार्टी बनाने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
'धनुष पार्टी बनाएंगे तो आधव अर्जुन सबसे पहले जाएंगे' वाला दावा DMK नेता आरएस भारती का राजनीतिक तंज है। इसे किसी तय राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
लेकिन इस बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में दो दिलचस्प सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। पहला, विजय के बेहद करीबी माने जाने वाले नेताओं की राजनीतिक निष्ठा आने वाले वर्षों में कितनी मजबूत रहती है। दूसरा, क्या धनुष वास्तव में अपने प्रशंसक नेटवर्क को सामाजिक कार्य से आगे राजनीतिक संगठन में बदलेंगे?
फिलहाल धनुष समाजसेवा पर जोर दे रहे हैं और उनके खेमे ने राजनीतिक अटकलों की पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर आधव अर्जुन विजय के साथ TVK में बने हुए हैं। ऐसे में DMK का बयान अभी राजनीतिक कटाक्ष से ज्यादा कुछ नहीं है। फिर भी तमिलनाडु की फिल्म और राजनीति की पुरानी परंपरा को देखते हुए धनुष की हर सामाजिक गतिविधि और विजय के खेमे की हर प्रतिक्रिया पर आने वाले दिनों में सियासी नजर जरूर बनी रहेगी।
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