
तमिलनाडु : जीएसटी राजस्व को लेकर सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) और विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। टीवीके ने डीएमके के उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें राज्य के जीएसटी संग्रह में सितंबर के दौरान 5 प्रतिशत गिरावट आने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी का कहना है कि राज्य का वास्तविक जीएसटी राजस्व घटने के बजाय 16.1 प्रतिशत बढ़ा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि डीएमके अधूरे आंकड़ों के आधार पर सरकार के खिलाफ प्रचार कर रही है और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब डीएमके राज्य की आर्थिक स्थिति और सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठा रही है। पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु और डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने दावा किया था कि तमिलनाडु के जीएसटी संग्रह में लगातार तीन महीनों से गिरावट दर्ज की जा रही है। उनके अनुसार, सितंबर में जीएसटी संग्रह में 5 प्रतिशत की कमी आई।
इसके जवाब में टीवीके की सूचना प्रौद्योगिकी शाखा ने कहा कि केवल सकल जीएसटी आंकड़ों को देखकर राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करना उचित नहीं है। पार्टी का तर्क है कि जीएसटी निपटान के बाद तमिलनाडु को वास्तव में मिलने वाले राजस्व में 16.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। टीवीके ने अपने दावे के समर्थन में राज्य के वित्त सचिव की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का भी हवाला दिया।
जीएसटी आंकड़ों को लेकर दोनों दलों के दावों में अंतर
डीएमके ने जीएसटी संग्रह में आई गिरावट को राज्य की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ते हुए सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु का कहना है कि जीएसटी संग्रह घरेलू आर्थिक गतिविधियों और राज्य के भीतर होने वाले लेनदेन की स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद भी संग्रह में गिरावट चिंता का विषय है।
वहीं, टीवीके का कहना है कि सकल जीएसटी संग्रह और निपटान के बाद राज्य को मिलने वाले राजस्व में अंतर होता है। पार्टी के अनुसार, तमिलनाडु जैसे बड़े विनिर्माण और वितरण केंद्र वाले राज्य में एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) के निपटान का प्रभाव आंकड़ों पर पड़ता है। इसलिए राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करते समय निपटान के बाद मिलने वाले राजस्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
टीवीके ने डीएमके पर लगाए राजनीतिक प्रचार के आरोप
टीवीके की सूचना प्रौद्योगिकी शाखा ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में आरोप लगाया कि डीएमके अधूरे आंकड़ों का इस्तेमाल करके राज्य की अर्थव्यवस्था में गिरावट और प्रशासनिक विफलता की धारणा बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने कहा कि केवल सकल जीएसटी संग्रह के आंकड़े सामने रखकर निपटान के बाद होने वाली वृद्धि को नजरअंदाज करना जनता के सामने अधूरी तस्वीर पेश करने जैसा है।
टीवीके ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके राजनीतिक कारणों से राजस्व के आंकड़ों को लेकर गलत प्रचार कर रही है। हालांकि, यह टीवीके की ओर से लगाए गए आरोप हैं। दूसरी ओर, डीएमके का कहना है कि निपटान के बाद राजस्व में वृद्धि को दिखाकर राज्य के भीतर आर्थिक गतिविधियों में आई गिरावट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कनिमोझी और थंगम थेन्नारसु ने भी उठाए थे सवाल
डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि और पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु ने राज्य के जीएसटी संग्रह में गिरावट को लेकर सरकार की आलोचना की थी। थेन्नारसु ने तर्क दिया कि दूसरे राज्यों से आने वाली वस्तुओं और आयात से जुड़े आईजीएसटी राजस्व को जोड़ने से राज्य के भीतर की आर्थिक गतिविधियों का पूरा आकलन नहीं हो सकता। कनिमोझी ने भी आम लोगों की क्रय शक्ति और दैनिक जरूरतों पर बढ़ते खर्च का उल्लेख करते हुए जीएसटी संग्रह में गिरावट को लेकर चिंता जताई थी।
इस तरह दोनों दल एक ही राजस्व व्यवस्था के अलग-अलग आंकड़ों और उनके अर्थ को लेकर अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। जहां डीएमके सकल जीएसटी संग्रह में गिरावट को आर्थिक चिंता का संकेत बता रही है, वहीं टीवीके निपटान के बाद राजस्व में 16.1 प्रतिशत वृद्धि को सरकार के पक्ष में रख रही है।
राजस्व के आंकड़ों पर आगे भी जारी रह सकती है बहस
तमिलनाडु में जीएसटी संग्रह को लेकर छिड़ा विवाद अब सरकार के आर्थिक प्रदर्शन और विपक्ष के दावों के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। टीवीके ने डीएमके के 5 प्रतिशत गिरावट वाले दावे को अधूरा बताते हुए 16.1 प्रतिशत वृद्धि का आंकड़ा सामने रखा है। दूसरी ओर, डीएमके का तर्क है कि सकल जीएसटी संग्रह में कमी राज्य की आंतरिक आर्थिक गतिविधियों के लिए चिंता का विषय है।
दोनों आंकड़े अलग-अलग आधारों पर आधारित दावों से जुड़े हैं। इसलिए राज्य की आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए यह समझना जरूरी है कि सकल संग्रह, आईजीएसटी निपटान और राज्य को वास्तव में मिलने वाले राजस्व में क्या अंतर है। फिलहाल, टीवीके ने डीएमके पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है, जबकि डीएमके सरकार के आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठा रही है। इस विवाद में दोनों पक्षों के दावों को समझने के लिए आंकड़ों के आधार और उनकी गणना की पद्धति को देखना महत्वपूर्ण होगा।





