
चेन्नई: IIT-मद्रास के ओशन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स ने 'न्योर्ड चैलेंज 2026' (Njord Challenge) जीता है। यह नॉर्वे में होने वाला एक इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन है, जिसमें असल समुद्री हालात में ऑटोनॉमस सरफेस वेसल्स (बिना ड्राइवर के चलने वाले समुद्री जहाज) की टेस्टिंग की जाती है।
'टीम अरित्रा' ने 90.42 पॉइंट्स के साथ ओवरऑल चैंपियनशिप जीती। उन्होंने तुर्की की 'MYS YAVUZ' (79.90 पॉइंट्स) और पोलैंड की 'AGH सोलर बोट' (79.63 पॉइंट्स) को पीछे छोड़ा। नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU) द्वारा आयोजित यह कॉम्पिटिशन 10 से 14 अगस्त तक ट्रॉनडहाइम में हुआ। इसमें नौ देशों की 23 टीमों और लगभग 150 पार्टिसिपेंट्स ने हिस्सा लिया।
टीमों का मूल्यांकन ऑटोनॉमस डॉकिंग, टक्कर से बचने की क्षमता, मैन्युवरिंग (जहाज को घुमाने-फिराने की क्षमता) और रास्ता खोजने की क्षमता के आधार पर किया गया। इसके अलावा टेक्निकल इंस्पेक्शन, रिपोर्टिंग और प्रेजेंटेशन को भी परखा गया। एक सरप्राइज़ ऑटोनॉमी चैलेंज के ज़रिए अनजान हालात में ढलने की उनकी क्षमता की भी परीक्षा ली गई।
टीम को डॉ. अभिलाष शर्मा सोमयाजुला और प्रो. एम.ए. आत्मानंद ने गाइड किया और उन्हें 'मरीन ऑटोनॉमस वेसल्स लेबोरेटरी' से मदद मिली। ओशन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के वेव बेसिन और IIT-M कैंपस की झील में बड़े पैमाने पर टेस्टिंग ने टीम को तैयार करने में मदद की।
'टीम अरित्रा' की यह जीत IIT-M की इस कॉम्पिटिशन में पहले मिली कामयाबी को और आगे बढ़ाती है। इससे पहले 2023 में एक और टीम ने दुनिया भर में तीसरा स्थान हासिल किया था और 'सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड' जीता था। ऑटोनॉमस सरफेस वेसल्स का इस्तेमाल समुद्री निगरानी, इंफ्रास्ट्रक्चर की मॉनिटरिंग, पर्यावरण से जुड़े डेटा इकट्ठा करने और हाइड्रोग्राफिक सर्वे जैसे कामों में किया जा सकता है।





