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Telangana तेलंगाना: चेन्नई में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार मार्च तिमाही (Q1 2026) में भारत में सोने की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान कुल मांग 10 प्रतिशत बढ़कर 151 टन पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 137 टन थी। वहीं मूल्य के हिसाब से सोने की मांग लगभग दोगुनी होकर 2.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस तिमाही में सोने की मांग का कुल मूल्य 2,27,530 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही के 1,14,600 करोड़ रुपये की तुलना में 99 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से निवेश मांग में तेज उछाल के कारण देखी गई है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, इस बार सोने की मांग का प्रमुख चालक ज्वेलरी नहीं बल्कि निवेश से जुड़ी मांग रही। सिक्कों, बार और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेश में तेज वृद्धि हुई, जिसने पारंपरिक आभूषण मांग को पीछे छोड़ दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने को प्राथमिकता दी है। सोने को हमेशा से सुरक्षित संपत्ति (सेफ हेवन एसेट) माना जाता है, और यही वजह है कि अस्थिर आर्थिक परिस्थितियों में इसकी मांग बढ़ जाती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निवेश आधारित मांग में वृद्धि का सीधा असर कुल खपत पैटर्न पर पड़ा है। पहले जहां भारत में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी सेक्टर से आता था, वहीं अब निवेश साधन प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
सिक्कों और गोल्ड बार की मांग में तेजी विशेष रूप से रिटेल और छोटे निवेशकों के बीच देखी गई है। इसके अलावा, गोल्ड ETF में निवेश करने वालों की संख्या भी बढ़ी है, जिससे डिजिटल और वित्तीय माध्यमों से सोने में निवेश का चलन मजबूत हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों, मुद्रास्फीति और मुद्रा अस्थिरता के कारण सोने की ओर निवेशकों का रुझान बढ़ा है। भारत जैसे बाजार में, जहां सोना पारंपरिक रूप से भी लोकप्रिय निवेश और सांस्कृतिक संपत्ति माना जाता है, वहां यह प्रभाव और अधिक स्पष्ट दिखा है।
वहीं ज्वेलरी सेक्टर की तुलना में निवेश मांग का बढ़ना यह भी दर्शाता है कि उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव आ रहा है। लोग अब केवल आभूषण खरीदने के बजाय सोने को एक वित्तीय सुरक्षा के रूप में भी देख रहे हैं।
रिपोर्ट में यह संकेत भी दिया गया है कि आने वाले समय में अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनिश्चित बनी रहती हैं, तो सोने की निवेश मांग और बढ़ सकती है। हालांकि ज्वेलरी मांग पर त्योहारों और शादियों का असर बना रहेगा, लेकिन कुल मांग में निवेश की हिस्सेदारी मजबूत बनी रह सकती है।
कुल मिलाकर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की यह रिपोर्ट बताती है कि भारत में सोने की मांग न केवल बढ़ रही है, बल्कि उसका स्वरूप भी बदल रहा है, जहां निवेश अब सबसे बड़ा चालक बनता जा रहा है।
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