
Tamil Nadu तमिलनाडु: पूर्व मंत्री एवं डीएमके नेता ई.वी. वेलु के आवास पर एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा की गई लूट के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस कार्रवाई के बाद डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी किसी भी प्रकार की धमकियों से डरने वाली नहीं है और कानूनी तरीकों से हर कार्रवाई का सामना करती है।
यह होटल तिरुवन्नमलाई जिले के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित ई.वी. वेलु के आवास पर की गई थी। एंटी-करप्शन विभाग की इस कार्रवाई के दौरान अधिकारी पूरे समय घर में मौजूद रहे और जांच की प्रक्रिया जारी रखी। इस दौरान पूर्व मंत्री ने जांच में पूरी मदद की और सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करायी। बताया गया कि आगे वे इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी में हैं।
इंट्री के बाद राजनीतिक महासागर और अधिक गरमा गया, जिसके बाद एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। अपने पोस्ट में उन्होंने कहा कि डीएमके पार्टी की धमकियों से डरने वाली नहीं है और पार्टी के इतिहास में संघर्ष और यश का सामना करना आ रहा है।
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि द्रमुक के राजनीतिक बदलाव की भावनाओं से जुड़े कई मामलों में आरोप साबित नहीं हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे मामलों का उद्देश्य केवल राजनीतिक दबाव बनाना होता है, लेकिन उनकी पार्टी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए हर आरोप का सामना करती है।
एम.के. स्टालिन ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि डीएमके कोई ऐसा आंदोलन नहीं है जो दबाव या धमकियों से डर जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी पहले भी कठिन विद्रोह और दमन का सामना करने के लिए तैयार है और आगे भी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी लिखा कि उनकी पार्टी सत्य और न्याय के मार्ग पर हर स्थान पर बस्ती से आगे बढ़ेगी।
इस पूरी घटना ने तमिल की राजनीति में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव को मिला दिया है। नामांकन का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हो सकती है, जबकि नामांकन का कहना है कि जांच पूरी तरह से खारिज की जा रही है और इसका उद्देश्य केवल कानून का पालन करना सुनिश्चित करना है।
प्रोडक्ट के बाद DMK के तर्क और प्रशंसा में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई जगहों पर पार्टी ने इस कार्रवाई को लेकर असंतोष व्यक्त किया और इसे राजनीतिक दबाव बताया। इसके अलावा, नेशनल लेवल पर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
इस मामले के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी राजनीतिक रुख सामने आने की संभावना है। समानता और सत्तापक्ष के बीच यह तानाशाही एक बार फिर से राष्ट्रवाद में आ गई है, जिससे राज्य का राजनीतिक तानाशाही और अधिक गर्म हो गया है।





