
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ टीवीके और मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। डीएमके ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को “मौकापरस्त” बताते हुए उनके नेतृत्व वाले गठबंधन पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि विजय ने विधानसभा चुनाव से पहले जिन राजनीतिक दलों को “कैश-बॉक्स अलायंस पार्टियां” कहा था, अब उन्हीं दलों के समर्थन से वह सत्ता में हैं।
डीएमके ने अपने तमिल मुखपत्र ‘मुरासोली’ के 11 सितंबर 2026 के संपादकीय में विजय और सत्तारूढ़ गठबंधन पर निशाना साधा। संपादकीय में टीवीके नेतृत्व वाले गठबंधन का नाम “सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस” रखे जाने का उल्लेख करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा गया, “उनके चेहरे देखिए।” इसे सत्ताधारी गठबंधन में शामिल दलों और उनके नेताओं की तरफ स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
डीएमके का कहना है कि विजय ने विधानसभा चुनावों से पहले अपने भाषणों में कुछ राजनीतिक पार्टियों पर केवल सीट और पैसे के लिए गठबंधन करने का आरोप लगाया था। उन्होंने इन दलों के लिए “कैश-बॉक्स अलायंस पार्टियां” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। अब उन्हीं दलों के साथ मिलकर सरकार चलाने के कारण विपक्ष ने मुख्यमंत्री की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
पार्टी ने पूछा, “विजय के अपने शब्दों के अनुसार, क्या अब उन्हें ‘कैश-बॉक्स अलायंस पार्टियां’ नहीं कहा जाना चाहिए?” डीएमके ने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने के लिए विजय ने अपने पुराने बयानों और राजनीतिक सिद्धांतों को किनारे कर दिया। विपक्षी दल का दावा है कि चुनाव से पहले कही गई बातों और सरकार बनाने के बाद लिए गए निर्णयों के बीच बड़ा विरोधाभास दिखाई देता है।
‘मुरासोली’ के संपादकीय में विजय के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने डीएमके मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ को लेकर टिप्पणी की थी। विजय ने कथित तौर पर कहा था, “अगर आप बस अरिवालयम के गेट के पास से गुजरें, तो वे उन पार्टियों को अंदर बुलाएंगे और उन्हें सीटें दे देंगे।” उस समय उनकी टिप्पणी को डीएमके की गठबंधन नीति और सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे पर तंज के रूप में देखा गया था।
अब डीएमके ने उसी बयान को आधार बनाकर विजय पर पलटवार किया है। पार्टी ने कहा कि मुख्यमंत्री आज जिन राजनीतिक दलों के समर्थन से सत्ता में बैठे हैं, उन्होंने भी गठबंधन के माध्यम से विधानसभा में प्रवेश करने का अधिकार हासिल किया था। डीएमके का तर्क है कि चुनावी सहयोग को लेकर पार्टी पर हमला करने वाले विजय ने सत्ता प्राप्त करने के लिए अंततः उसी गठबंधन व्यवस्था को स्वीकार कर लिया।
विपक्ष ने पनायूर स्थित टीवीके मुख्यालय के बाहर सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं के कथित फोटो शूट का भी उल्लेख किया। डीएमके ने तंज कसते हुए कहा कि जिन दलों की राजनीतिक निष्ठा और मंशा पर विजय पहले सवाल उठाते थे, अब उनके साथ सार्वजनिक रूप से तस्वीरें खिंचवा रहे हैं। पार्टी ने इसे राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदले गए रुख का उदाहरण बताया।
डीएमके के अनुसार, गठबंधन बनाना लोकतांत्रिक राजनीति का सामान्य हिस्सा है और अलग-अलग दल साझा कार्यक्रम के आधार पर साथ आ सकते हैं। लेकिन जब कोई नेता पहले गठबंधन की राजनीति का मजाक उड़ाए और बाद में उसी रास्ते से सत्ता हासिल करे, तो उसे जनता के सामने जवाब देना चाहिए। पार्टी ने कहा कि सवाल गठबंधन बनाने का नहीं, बल्कि विजय के कथित दोहरे राजनीतिक मानदंडों का है।
संपादकीय में टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन के नाम पर भी सवाल उठाए गए। “सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस” में धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर डीएमके ने कहा कि किसी गठबंधन का चरित्र उसके नाम से नहीं, बल्कि उसमें शामिल दलों की राजनीति, नीतियों और कार्यों से तय होता है। इसलिए केवल आकर्षक नाम रख लेने से राजनीतिक विरोधाभास समाप्त नहीं हो जाते।
सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्ष राजनीति तमिलनाडु में लंबे समय से महत्वपूर्ण चुनावी विषय रहे हैं। डीएमके इन दोनों मुद्दों को अपनी वैचारिक पहचान का मुख्य आधार बताती रही है। ऐसे में टीवीके द्वारा अपने गठबंधन के नाम में इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करना दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बन गया है। डीएमके की कोशिश है कि वह सामाजिक न्याय के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक बढ़त कायम रखे।
मुख्यमंत्री विजय और उनकी पार्टी की ओर से डीएमके के इन आरोपों पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है। सत्तारूढ़ पक्ष यह तर्क दे सकता है कि चुनाव के बाद जनादेश और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाना आवश्यक था। हालांकि डीएमके ने पुराने बयानों को सामने लाकर मुख्यमंत्री पर नैतिक एवं राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की है।
तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। डीएमके अब मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में सत्तारूढ़ टीवीके की नीतियों, चुनावी वादों और गठबंधन के भीतर संबंधों को लेकर सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है। वहीं टीवीके के सामने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने के साथ सहयोगी दलों के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, फिल्मों से राजनीति में आए विजय ने स्वयं को पारंपरिक दलों से अलग विकल्प के रूप में पेश किया था। इस कारण उनके पुराने भाषणों और मौजूदा फैसलों की लगातार तुलना की जा रही है। डीएमके इसी अंतर को आधार बनाकर यह संदेश देना चाहती है कि विजय की राजनीति भी अंततः उन्हीं गठबंधन समझौतों पर टिकी है, जिनकी वह पहले आलोचना करते थे।
डीएमके के हमले में व्यक्तिगत टिप्पणी से ज्यादा राजनीतिक विश्वसनीयता का सवाल प्रमुख दिखाई देता है। पार्टी ने मुख्यमंत्री से स्पष्ट करने को कहा है कि जिन दलों को कभी पैसे और सीटों के लिए गठबंधन करने वाला बताया गया था, वे अब उनके लिए स्वीकार्य कैसे हो गए। विपक्ष का कहना है कि विजय को अपने पुराने आरोपों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
‘मुरासोली’ का यह संपादकीय बताता है कि डीएमके सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मौजूद कथित विरोधाभासों को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री विजय के पुराने बयानों, वर्तमान सहयोगियों और गठबंधन के नाम को जोड़ते हुए पार्टी ने उन्हें मौकापरस्त करार दिया है। अब इस आरोप पर टीवीके की प्रतिक्रिया से दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव की अगली दिशा तय होगी।





