
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कावेरी नदी से जुड़े मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु द्वारा दी गई आपत्तियों और अनुरोधों पर विचार किए बिना कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव पर आगे बढ़ना चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तमिलनाडु की ओर से उठाई गई चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए कर्नाटक के मेकेदातु प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर विचार किया है। उन्होंने इस प्रक्रिया को असंतुलित बताते हुए कहा कि यह निर्णय कावेरी जल बंटवारे से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे के खिलाफ जाता है।
सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि कर्नाटक सरकार द्वारा तैयार DPR को खारिज किया जाए। उनका कहना है कि यह परियोजना कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल के अंतिम फैसले और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी आग्रह किया कि प्रधानमंत्री कर्नाटक सरकार को स्पष्ट रूप से सलाह दें कि वह किसी भी नए जल परियोजना को शुरू करने से पहले को-बेसिन राज्यों की सहमति अनिवार्य रूप से प्राप्त करे। उन्होंने कहा कि बिना आपसी सहमति के किसी भी तरह का निर्माण कार्य या योजना क्षेत्रीय विवादों को और बढ़ा सकता है।
उन्होंने अपने बयान में यह भी जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन सभी राज्यों के लिए बाध्यकारी है और किसी भी राज्य को इससे अलग जाकर कदम नहीं उठाना चाहिए। उनका कहना है कि कावेरी जल विवाद एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसमें सभी संबंधित राज्यों के हितों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
तमिलनाडु सरकार का मानना है कि मेकेदातु परियोजना से राज्य के निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे किसानों और जल आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। इसी कारण राज्य लगातार इस परियोजना का विरोध करता रहा है।
वहीं, कर्नाटक सरकार का तर्क है कि यह परियोजना पीने के पानी की आपूर्ति और बाढ़ नियंत्रण के लिए जरूरी है, जबकि तमिलनाडु इसे जल बंटवारे के मौजूदा समझौतों के खिलाफ मानता है।
इस विवाद के चलते एक बार फिर कावेरी जल मुद्दा सुर्खियों में आ गया है और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या कोई नया समाधान सामने आता है।
कुल मिलाकर, मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।





