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पुडुचेरी। पुडुचेरी के प्रसिद्ध कौशिक बालासुब्रमण्यम मंदिर में 73वां कंदा सष्टि महोत्सव धूमधाम से शुरू हो गया है। इस अवसर पर मंदिर में झंडा फहराने की रस्म के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे और उन्होंने देवता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि इस महोत्सव में प्रत्येक दिन भक्तों की सुविधा के लिए विभिन्न वाहनों की व्यवस्था की गई है ताकि वे आसानी से कार्यक्रम में भाग ले सकें और मंदिर में दर्शन कर सकें। इस धार्मिक उत्सव का आयोजन पुडुचेरी में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।
महोत्सव की मुख्य घटनाएँ
इस वर्ष के कंदा सष्टि महोत्सव में कई विशेष अनुष्ठान और उत्सव आयोजित किए जाएंगे। 26 अक्टूबर को वेल वांगा का आयोजन किया जाएगा, जो कि महोत्सव की प्रमुख परंपराओं में से एक है। इसके अगले दिन, यानि 27 अक्टूबर की रात को सूरसाम्हार उत्सव होगा, जिसमें भगवान स्कंद (मुरुगन) द्वारा असुरों का संहार करने की कथात्मक प्रस्तुति की जाएगी। इसके बाद 28 अक्टूबर को तिरुकल्यानम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भगवान मुरुगन और देवी देवियों का विवाह समारोह पूजा रूप में किया जाएगा। यह आयोजन भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है और मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
18 दिवसीय महोत्सव की समाप्ति
इस साल महोत्सव 18 दिनों तक चलेगा। 7 नवंबर को उओंजल उत्सव के साथ कार्यक्रम का समापन प्रारंभ होगा। इसके अगले दिन, 8 नवंबर को वीरभगु और चंडिकेश्वर उत्सव आयोजित किए जाएंगे, जिनमें भक्तजन पारंपरिक रीति-रिवाजों और भक्ति गीतों के साथ भाग लेंगे। मंदिर प्रबंधन ने सुनिश्चित किया है कि सभी अनुष्ठान समय पर और विधिपूर्वक संपन्न हों।
मंदिर प्रशासन की तैयारियाँ
मंदिर ट्रस्टी और प्रशासन ने इस वर्ष के महोत्सव के लिए व्यापक तैयारी और व्यवस्था की है। उन्होंने दर्शनार्थियों के लिए सुरक्षा, बैठने और परिवहन की सुविधा सुनिश्चित की है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सफाई, सजावट और प्रकाश व्यवस्था भी विशेष रूप से की गई है। अधिकारियों ने बताया कि भक्तों की सुविधा के लिए प्रत्येक दिन विभिन्न स्थानों से विशेष वाहन सेवा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, मंदिर परिसर में स्वच्छता और सुरक्षा के उपायों को प्राथमिकता दी गई है ताकि श्रद्धालु महोत्सव का आनंद सुरक्षित रूप से ले सकें।
श्रद्धालुओं की भागीदारी
भक्तजन इस अवसर पर परिवार और मित्रों के साथ मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर में ध्वनि, रोशनी और पारंपरिक सजावट के बीच भगवान के दर्शन और पूजा करने का अवसर सभी के लिए उपलब्ध है। स्थानीय व्यापारियों और आयोजकों ने भी महोत्सव के दौरान आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की व्यवस्था की है। मंदिर के ट्रस्टी ने कहा कि यह महोत्सव केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं बल्कि पुडुचेरी की सांस्कृतिक विरासत और लोकसंस्कृति का उत्सव भी है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे धार्मिक रीति-रिवाजों और अनुशासन का पालन करें, ताकि महोत्सव शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। इस प्रकार, पुडुचेरी में 73वां कंदा सष्टि महोत्सव श्रद्धालुओं की भक्ति और संस्कृति के अद्भुत संगम का प्रतीक बनकर उभरा है, और आने वाले 18 दिनों तक यहाँ धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का उत्सव जारी रहेगा।
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