Rajasthani भाषा पर SC का बड़ा निर्देश, शिक्षा व्यवस्था में चरणबद्ध लागू करने की नीति बनाने को कहा

New Delhi, नई दिल्ली/जयपुर: Supreme Court of India से राजस्थानी भाषा के संरक्षण और शिक्षा व्यवस्था में इसके समावेश को लेकर अहम निर्देश जारी किए गए हैं। अदालत ने Rajasthan सरकार को सभी शिक्षण संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से राजस्थानी भाषा के शिक्षण और कार्यान्वयन के लिए नीति तैयार करने को कहा है।
न्यायमूर्ति Vikram Nath और Sandeep Mehta की पीठ ने पद्म मेहता और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि राजस्थानी भाषा का ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व काफी बड़ा है और इसे पहले से कई विश्वविद्यालयों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में मान्यता मिल चुकी है।
माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रदेश के स्कूलों में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य करने का निर्णय ऐतिहासिक है एवं स्वागत योग्य है।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) May 12, 2026
मुझे गर्व है कि हमारी कांग्रेस सरकार ने 25 अगस्त 2003 को विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बृज, वागड़ी, मालवी…
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा स्तर पर राजस्थानी भाषा को शामिल करने की नीति तैयार करने को कहा है। साथ ही 30 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी गई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Manish Singhvi ने अदालत में दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 350-ए, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग राजस्थानी भाषा बोलते हैं, लेकिन इसे अब तक शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान नहीं मिला।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने कहा कि सरकार इस दिशा में उचित निर्णय लेगी और मातृभाषा आधारित शिक्षा के लिए पहले ही कई कार्यबल गठित किए जा चुके हैं।
इस फैसले का स्वागत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार को भी राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।





