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Sirohi News : राजस्थान और गुजरात की सीमा पर स्थित सिरोही का आबूरोड एक बार फिर अवैध शराब तस्करी को लेकर सुर्खियों में है. शनिवार को आबूरोड रीको थाना पुलिस ने एक बड़ी तस्करी की साजिश का पर्दाफाश करते हुए ट्रैवल्स बस में शराब की तस्करी करते हुए आठ महिलाओं को रंगे हाथों गिरफ्तार किया. यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि शराब तस्करी के मामलों में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की गिरफ्तारी का अब तक का यह पहला मामला है. पुलिस के अनुसार ये महिलाएं राजस्थान निर्मित अंग्रेजी शराब के 14 कार्टन छिपाकर गुजरात के अहमदाबाद ले जा रही थीं. शराब को बैग और कपड़ों में इस तरह छिपाया गया था कि साधारण जांच में भी पकड़ में नहीं आ सके. लेकिन पुलिस की सतर्कता और सटीक सूचना ने उनकी योजना को नाकाम कर दिया. नाकाबंदी के दौरान पकड़ी गई तस्करी आबूरोड रीको थाने के एसएचओ लक्ष्मण सिंह चंपावत के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सीमावर्ती मावल चौकी पर विशेष नाकाबंदी अभियान चलाया हुआ था|
इस दौरान मुखबिर की सूचना पर गुजरात की ओर जा रही एक ट्रैवल्स बस को रोका गया. बस की गहन तलाशी के दौरान महिलाओं द्वारा तस्करी कर लाई जा रही शराब की पेटियां बरामद की गईं। पूछताछ में पता चला कि ये महिलाएं रात को अहमदाबाद से आबू रोड आती थीं और विभिन्न शराब की दुकानों से शराब खरीदकर सुबह अहमदाबाद लौट जाती थीं। वहां ये इस शराब को ऊंचे दामों पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमाती थीं। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ये महिलाएं शराब की खेप कहां से खरीदती थीं और इनके पीछे कोई संगठित गिरोह तो नहीं है।
गिरफ्तार महिलाओं की पहचान आशा पत्नी महेश चुनारा, भगवती पत्नी नरोत्तम चुनारा, रोशनी पत्नी विकास चुनारा, सुनीताबेन पत्नी धांदूभाई चुनारा, मंजूवेन पुत्री जावरभाई चुनारा, कविता पत्नी रमेश पुत्री मुकेशभाई चुनारा, बेबीबेन पत्नी अनिल चुनारा और अनीता पत्नी प्रकाश चुनारा के रूप में हुई है। ये सभी महिलाएं गुजरात के अहमदाबाद में झुग्गी-झोपड़ियों की रहने वाली हैं। शराब तस्करी में महिलाओं का इस्तेमाल
थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह चंपावत ने बताया कि पुलिस से बचने के लिए तस्कर अब महिलाओं को मोर्चे पर भेज रहे हैं, ताकि उन पर शक कम हो और वे तलाशी से भी बच सकें। यह तरीका कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई चुनौती बनकर उभर रहा है। इस पूरी कार्रवाई में थानाधिकारी के साथ सब इंस्पेक्टर पूराराम, हेड कांस्टेबल किशनलाल, कांस्टेबल जयंतीलाल, प्रवीण सिंह, मालदेव, हिंदूराम, सुश्री हल्दी, रामचंद्र और प्रकाशचंद भी शामिल थे। इन सभी की सतर्कता के कारण ही इस संगठित तस्करी को समय रहते रोका जा सका।
पुलिस अब इस मामले की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है। अधिकारियों के अनुसार संभव है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो, जो महिलाओं को मोहरा बनाकर तस्करी कर रहा हो। अब पुलिस यह भी पता लगाएगी कि इन महिलाओं को शराब कौन सप्लाई कर रहा था और इसे आगे कहां बेचा जाना था।
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