राजस्थान

दिवाली पर पटाखे फोड़ने के नियम बदले, राजस्थान के 6 जिलों में सख्ती

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 12:53 PM IST
दिवाली पर पटाखे फोड़ने के नियम बदले, राजस्थान के 6 जिलों में सख्ती
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जयपुर। दीपावली के त्योहार से पहले राजस्थान सरकार ने पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल राजस्थान के छह जिलों में इस बार केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही चलाए जा सकेंगे। सरकार ने बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार, इन जिलों में 7 और 8 नवंबर 2026 को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति होगी। इसके अलावा अन्य समय पर आतिशबाजी करने पर प्रतिबंध रहेगा। पटाखों की बिक्री के लिए भी QR कोड, प्रमाणन और लाइसेंस संबंधी नियम अनिवार्य किए गए हैं।
राजस्थान के इन 6 जिलों में लागू होंगे नियम
राजस्थान सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने एनसीआर में शामिल छह जिलों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।इन जिलों में अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ शामिल हैं।इन सभी जिलों में पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।सरकार का उद्देश्य दीपावली के दौरान होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है, ताकि आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाया जा सके।प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
7 और 8 नवंबर को सिर्फ तीन घंटे की छूट
सरकार की ओर से ग्रीन पटाखे चलाने के लिए दो अलग-अलग समय निर्धारित किए गए हैं।दोनों दिन सुबह 6 बजे से 7 बजे तक एक घंटे और रात 8 बजे से 10 बजे तक दो घंटे की अनुमति होगी।इस प्रकार प्रत्येक दिन कुल तीन घंटे ही पटाखे चलाए जा सकेंगे।निर्धारित समय के अलावा पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी।यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुरूप लागू की गई है।
6 नवंबर तक पूर्ण प्रतिबंध, 9 नवंबर से फिर रोक
पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की शासन सचिव शैलजा देवल के अनुसार, एनसीआर क्षेत्र में पटाखों पर पहले से लागू प्रतिबंध 6 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।इसके बाद 7 और 8 नवंबर को केवल निर्धारित समय में प्रमाणित ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी।यह छूट केवल दो दिनों के लिए होगी।9 नवंबर 2026 से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू हो जाएगा।इसका अर्थ है कि दीपावली के आसपास भी लोग अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय पटाखे नहीं चला सकेंगे।सरकार ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सिर्फ ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति
नए नियमों के अनुसार, राजस्थान के इन छह जिलों में केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही बेचे और इस्तेमाल किए जा सकेंगे।सामान्य पटाखों और ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहेगा, जिन्हें संबंधित संस्थान से ग्रीन पटाखों के रूप में मंजूरी नहीं मिली है।इसके अतिरिक्त बेरियम युक्त पटाखों और श्रृंखला में जुड़े पटाखों यानी लड़ियों के निर्माण तथा बिक्री पर भी रोक लगाई गई है।ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से विकसित किए जाते हैं। हालांकि, इनसे भी धुआं और प्रदूषक उत्सर्जित हो सकते हैं। इसलिए सरकार ने इनके उपयोग का समय भी सीमित रखा है।
QR कोड के बिना नहीं बिकेंगे पटाखे
इस बार पटाखों की बिक्री के लिए QR कोड अनिवार्य किया गया है।सरकार के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक प्रमाणित ग्रीन पटाखे के पैकेट पर संबंधित उत्पाद और बैच का QR कोड होना जरूरी है।इस QR कोड को स्कैन करने पर निर्माता का नाम, NEERI पंजीकरण, आवश्यक लाइसेंस और उत्पाद की जांच संबंधी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।इस व्यवस्था का उद्देश्य नकली और प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री रोकना है।यदि किसी पैकेट पर QR कोड नहीं है या उसमें
छेड़छाड़
की गई है, तो उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्पाद-विशिष्ट QR कोड को अनिवार्य करते हुए इनके गलत इस्तेमाल पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
ऑनलाइन पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध
सरकार ने पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगाई है।केवल निर्धारित और अधिकृत दुकानों पर ही प्रमाणित ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति होगी।बिना वैध लाइसेंस के पटाखों की बिक्री करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।इसके अलावा पटाखों का अवैध भंडारण, परिवहन और प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति रोकने के लिए भी प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं।पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें बिक्री केंद्रों की निगरानी करेंगी।
अस्पताल और स्कूलों के पास पटाखे चलाना प्रतिबंधित
नए नियमों में संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और शिक्षण संस्थानों के आसपास पटाखे चलाने पर रोक रहेगी।इन संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में आतिशबाजी की अनुमति नहीं होगी।इन क्षेत्रों को पटाखा प्रतिबंधित क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया जाएगा।इसका उद्देश्य मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों को तेज आवाज तथा प्रदूषण के प्रभाव से बचाना है।
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
राजस्थान सरकार ने पटाखों की अवैध बिक्री और इस्तेमाल को रोकने के लिए संबंधित विभागों को सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं।नियमों का उल्लंघन होने पर प्रतिबंधित पटाखों की जब्ती और संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।इसके लिए पुलिस, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी एजेंसियां आपसी समन्वय से काम करेंगी।साथ ही वायु गुणवत्ता की निगरानी करने और प्रदूषण की स्थिति का आकलन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रदूषण रोकने के लिए उठाया गया कदम
दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।विशेष रूप से सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों, बच्चों और बुजुर्गों को प्रदूषित हवा से अधिक परेशानी हो सकती है।इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पटाखों के इस्तेमाल को सीमित किया है।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से त्योहार मनाएं।इस बार एनसीआर में शामिल राजस्थान के छह जिलों में दीपावली मनाने वालों को पटाखे खरीदने से पहले उनका प्रमाणन और QR कोड जरूर जांचना होगा।
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