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राजस्थान: यहां होता है भगवान जगन्नाथ और जानकी का विवाह, इंद्र विमान पर निकलेगी भगवान जगन्नाथ की यात्रा

Gulabi Jagat
4 July 2022 8:00 PM IST
राजस्थान: यहां होता है भगवान जगन्नाथ और जानकी का विवाह, इंद्र विमान पर निकलेगी भगवान जगन्नाथ की यात्रा
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राजस्थान न्यूज
अलवर. आगामी 8 जुलाई को जिले में इंद्र विमान में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा (Alwar Jagannath Rath Yatra) निकाली जाएगी. इस रथयात्रा में हर साल की तरह बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है. इस अवसर पर 3 दिनों तक जिले में मेला भरता है. भगवान जगन्नाथ और माता जानकी का विवाह भी होता है. उसके बाद भगवान जगन्नाथ वापस जानकी जी के साथ मंदिर लौटते हैं. मेले में शामिल होने के लिए अलवर के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात और आसपास शहरों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं. अलवर में 1863 साल से मेला भर रहा है जबकि जगन्नाथ मंदिर ढाई सौ वर्ष पुराना है.
अलवर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पर मेले का खास महत्व है. कोरोना के चलते दो साल तक रथ यात्रा नहीं निकाली गई थी और न ही मेला लगा था. ऐसे में इस साल मेले को लेकर लोगों में खासा उत्साह है. 26 जून गणेश पूजन के साथ जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. 15 दिनों तक मंदिर में विशेष कार्यक्रम होते हैं. अलवर की रथयात्रा और मेला खास पहचान रखता है. मंदिर के पुजारी ने बताया कि अलवर में भगवान जगन्नाथ और जानकी का विवाह होता है.
नगर भ्रमण को निकलेंगे भगवान जगन्नाथ
तीन दिनों तक लगेगा मेला
8 तारीख को भगवान जगन्नाथ इंद्र विमान में सवार होकर शहर के मुख्य बाजारों में चौराहे से होते हुए रूपवास मेला स्थल पर पहुंचेंगे. तीन दिनों तक वहां मेला लगा रहेगा जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटेंगे. 10 जुलाई को माता जानकी की रथ यात्रा निकलेगी. 10 तारीख की रात को मेला स्थल पर मंदिर में भगवान जगन्नाथ व जानकी का विवाह होगा. उसके बाद जानकी जी के साथ भगवान जगन्नाथ वापस मंदिर लौटेंगे. इस दौरान भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के स्थान पर बूढ़े जगन्नाथ की प्रतिमा को रखा जाता है. रथ यात्रा में लाखों लोग शामिल होते हैं. मेले के दौरान अलवर के अलावा आसपास के कई राज्यों के शहरों से भी लोग घूमने के लिए भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए आते हैं.
भगवान का इंद्र विमान है खास
मंदिर के पुजारी ने बताया कि भगवान जगन्नाथ जिस इंद्र विमान यानी रथ से यात्रा पर निकलते हैं, वह बेहद खास होता है. महाराजा बख्तावर सिंह ने 210 साल पहले इस रथ का निर्माण करवाया था. इसमें शॉकर, रथ के टायर और कुछ सामान लंदन से मंगवाया गया था. खास कारीगरों ने इस रथ को तैयार किया था. रथ में तीन फ्लोर हैं. पहले महाराज बख्तावर सिंह इस रथ पर बैठकर शहर भ्रमण को निकलते थे. उस समय चार हाथी इस रथ को खींचा करते थे. उसके बाद महाराजा प्रताप सिंह इस रथ पर सवार होकर भ्रमण करते थे. बाद में भगवान जगन्नाथ की यात्रा के लिए इस रथ को दिया गया. साल भर यह रथ खाने में ही खड़ा रहता है. एक विशेष परिवार 5 पीढ़ियों से इस रथ की मरम्मत और देखभाल कर रहा है. इस रथ में कभी दीमक नहीं लगती है. यह आज भी बिल्कुल नया जैसा लगता है.
अलवर में होता है भगवान जगन्नाथ का विवाह
वैसे तो देश में अलग-अलग जगहों पर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलती है, लेकिन अलवर की जगन्नाथ रथ यात्रा खास है. दरसअल अलवर और राजगढ़ दो जगहों पर भगवान जगन्नाथ की बड़ी रथयात्रा निकलती है. दोनों ही जगहों पर भगवान जगन्नाथ से जानकी जी का विवाह होता है. इसलिए यह रथ यात्रा खास रहती है. इसमें लाखों लोग शामिल होते हैं. मेला में रथयात्रा के देखने के लिए दूर-दूर से लोग अलवर आते हैं.
अलवर प्रशासन ने शुरू की तैयारी
रथ यात्रा की व्यवस्था को लेकर अलवर प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है. 10 साल अलवर के रूपबास में 3 दिनों तक मेला भरता है. मेले के लिए जिले में एक दिन का स्थानीय अवकाश रखा जाता है. जिन सड़क मार्गों से होकर भगवान जगन्नाथ की रथ निकलती है उन रास्तों पर मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं. इसके अलावा रथ यात्रा के रास्ते में बिजली के तारों को ऊंचा करना व ठीक करने का काम भी चल रहा है. रास्ते में पेड़ों की छंटाई चल रही है. मेला स्थल पर प्रशासन की तरफ से साफ-सफाई की व्यवस्था की जा रही है. साथ ही अन्य इंतजाम भी मेले के लिए किए जा रहे हैं.
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