राजस्थान

गोडावण संरक्षण की नई पहल रामदेवरा में रीवाइल्डिंग एवियरी शुरू

Ratna Netam
3 Oct 2026 7:42 PM IST
गोडावण संरक्षण की नई पहल रामदेवरा में रीवाइल्डिंग एवियरी शुरू
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जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण और प्रजनन केंद्र में नवनिर्मित ‘रीवाइल्डिंग एवियरी’ का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने इस नई सुविधा को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड यानी गोडावण के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान की समृद्ध जैव-विविधता और वन्यजीव राज्य की प्राकृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनके संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कार्यक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, **“आज मैंने वर्चुअल माध्यम से रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण और प्रजनन केंद्र में नवनिर्मित पुनर्वास एवियरी का अनावरण किया और कार्यक्रम को संबोधित किया। यह गोडावण के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।”**
प्राकृतिक माहौल में रहने के लिए तैयार होंगे पक्षी
रीवाइल्डिंग एवियरी का उद्देश्य संरक्षण और प्रजनन केंद्र में पाले जा रहे गोडावण को अधिक प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना है। इस तरह के बड़े बाड़े पक्षियों को प्राकृतिक आवास जैसी परिस्थितियों में रहने, भोजन तलाशने और अपनी स्वाभाविक गतिविधियों के अनुकूल होने का अवसर देते हैं।गोडावण के संरक्षण में केवल उनकी संख्या बढ़ाना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भविष्य में पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण के लिए तैयार करना भी जरूरी है। इसी दिशा में रीवाइल्डिंग एवियरी जैसी सुविधाओं की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।यह सुविधा संरक्षण केंद्र और खुले प्राकृतिक आवास के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की तरह काम कर सकती है। यहां पक्षियों के व्यवहार और उनकी प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता पर भी नजर रखी जा सकती है।
राजस्थान की पहचान है गोडावण
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को राजस्थान में गोडावण के नाम से जाना जाता है। यह राजस्थान का राज्य पक्षी भी है और राज्य की रेगिस्तानी पारिस्थितिकी की पहचान माना जाता है। विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र इस पक्षी के प्रमुख प्राकृतिक आवासों में शामिल रहा है।गोडावण एक बड़ा और जमीन पर रहने वाला पक्षी है। खुले घास के मैदान और अर्ध-शुष्क क्षेत्र इसके प्राकृतिक आवास माने जाते हैं। पिछले कई दशकों में इसके प्राकृतिक आवास में कमी और अन्य खतरों के कारण इसकी आबादी पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।यही कारण है कि गोडावण के संरक्षण को लेकर राजस्थान में विशेष परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। प्रजनन केंद्रों के माध्यम से पक्षियों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
रामदेवरा केंद्र की अहम भूमिका
रामदेवरा स्थित गोडावण संरक्षण और प्रजनन केंद्र इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाओं में शामिल है। यहां वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन और संरक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।नए रीवाइल्डिंग एवियरी के बनने से केंद्र की क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। संरक्षण केंद्र में जन्म लेने वाले पक्षियों को प्राकृतिक परिस्थितियों के लिए तैयार करना लंबे समय की संरक्षण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।विशेषज्ञों के लिए भी ऐसी सुविधा महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे पक्षियों के व्यवहार, भोजन, स्वास्थ्य और प्राकृतिक वातावरण के प्रति उनकी प्रतिक्रिया का अध्ययन करने में मदद मिलती है।
जैव-विविधता को लेकर CM ने दिया संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कार्यक्रम के दौरान राजस्थान की जैव-विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।राजस्थान का भौगोलिक क्षेत्र काफी विविध है। एक तरफ थार का विशाल रेगिस्तान है तो दूसरी ओर अरावली पर्वतमाला, वन क्षेत्र, घास के मैदान और कई महत्वपूर्ण वेटलैंड मौजूद हैं। इन अलग-अलग पारिस्थितिकी क्षेत्रों में कई दुर्लभ वन्यजीव और पक्षी पाए जाते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। गोडावण संरक्षण परियोजना को भी इसी दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जोड़ा गया है।
गोडावण के सामने कई चुनौतियां
गोडावण की संख्या में गिरावट के पीछे कई कारण बताए जाते रहे हैं। प्राकृतिक घास के मैदानों में बदलाव, मानवीय गतिविधियों का विस्तार और दूसरे बुनियादी ढांचों के कारण इसके आवास प्रभावित हुए हैं।गोडावण का बड़ा आकार और उड़ान की प्रकृति भी इसे कुछ खतरों के प्रति संवेदनशील बनाती है। पश्चिमी राजस्थान में बिजली की ओवरहेड लाइनों से टकराव को इसके संरक्षण से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों में गिना जाता रहा है।इसके अलावा सुरक्षित प्रजनन क्षेत्र और पर्याप्त प्राकृतिक आवास बनाए रखना भी जरूरी है। संरक्षण कार्यक्रमों में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पक्षियों की आबादी को स्थिर करने और धीरे-धीरे बढ़ाने की कोशिश की जाती है।
प्रजनन के बाद रीवाइल्डिंग पर फोकस
किसी विलुप्तप्राय प्रजाति को बचाने के लिए कैप्टिव ब्रीडिंग यानी नियंत्रित वातावरण में प्रजनन एक महत्वपूर्ण तरीका है। हालांकि, केवल प्रजनन कार्यक्रम पर्याप्त नहीं होता। लंबे समय का लक्ष्य पक्षियों को इस तरह तैयार करना होता है कि वे प्राकृतिक वातावरण में अपने व्यवहार को बनाए रख सकें।रीवाइल्डिंग एवियरी इसी प्रक्रिया में उपयोगी हो सकती है। यहां गोडावण को अपेक्षाकृत बड़े और प्राकृतिक माहौल वाले क्षेत्र में रखा जा सकता है, जहां वे अपने स्वाभाविक व्यवहार का अभ्यास कर सकें।इसके बाद विशेषज्ञ पक्षियों के स्वास्थ्य और व्यवहार का आकलन कर सकते हैं। किसी पक्षी को प्राकृतिक आवास में छोड़ने का निर्णय वैज्ञानिक मूल्यांकन और उपयुक्त परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता है।
संरक्षण प्रयासों को मिलेगी मजबूती
रामदेवरा में नई सुविधा का उद्घाटन गोडावण संरक्षण कार्यक्रम के विस्तार की दिशा में एक और कदम है। राजस्थान में इस पक्षी के संरक्षण के लिए प्रजनन, प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और वैज्ञानिक निगरानी जैसे विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में गोडावण के संरक्षण को राज्य की प्राकृतिक धरोहर बचाने से जोड़ते हुए इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।गोडावण केवल राजस्थान का राज्य पक्षी ही नहीं, बल्कि थार के पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण प्रजातियों में भी शामिल है। ऐसे में इसकी संख्या में सुधार को मरुस्थलीय जैव-विविधता के संरक्षण के व्यापक प्रयासों से भी जोड़कर देखा जाता है।रामदेवरा के गोडावण संरक्षण और प्रजनन केंद्र में तैयार नई रीवाइल्डिंग एवियरी से संरक्षण कार्यक्रम को नई सुविधा मिली है। आने वाले समय में इस एवियरी में पक्षियों के व्यवहार और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने के परिणाम यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित तरीके से स्थापित करने की दिशा में संरक्षण कार्यक्रम कितना आगे बढ़ता है।
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