राजस्थान

लैब टेक्नीशियन मनोज प्रजापत ने दुर्लभ ओ-नेगेटिव रक्तदान कर तीन दिन के नवजात को दिया जीवनदान

Gulabi Jagat
9 July 2026 8:30 PM IST
लैब टेक्नीशियन मनोज प्रजापत ने दुर्लभ ओ-नेगेटिव रक्तदान कर तीन दिन के नवजात को दिया जीवनदान
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Bhilwara, भीलवाड़ा । शहर के राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक में मानवता, सेवा और कर्तव्यपरायणता का प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिला। अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत लैब टेक्नीशियन मनोज प्रजापत ने आपातकालीन स्थिति में दुर्लभ ओ-नेगेटिव (व्-छमहंजपअम) रक्तदान कर महज तीन दिन के नवजात शिशु को नया जीवन प्रदान किया। जानकारी के अनुसार महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती तीन दिन के नवजात शिशु की हालत गंभीर थी। चिकित्सकों ने तत्काल ओ-नेगेटिव ब्लड की आवश्यकता बताई। यह ब्लड ग्रुप अत्यंत दुर्लभ होने के कारण परिजनों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे समय में सहयोग सेवार्थ फाउंडेशन की प्रेरणा से ब्लड बैंक में कार्यरत लैब टेक्नीशियन मनोज प्रजापत बिना किसी विलंब के स्वयं रक्तदान के लिए आगे आए। मनोज प्रजापत का स्वयं का ब्लड ग्रुप भी ओ-नेगेटिव है।

उन्होंने तुरंत लाइव डोनेशन करते हुए ताजा रक्त उपलब्ध कराया, जिससे नवजात शिशु का समय पर उपचार संभव हो सका। उनकी तत्परता और सेवा भावना से मासूम की जान बचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली। उल्लेखनीय है कि मनोज प्रजापत का यह पहला सेवा कार्य नहीं है। वे इससे पहले भी कई आपातकालीन परिस्थितियों में दुर्लभ रक्त की आवश्यकता होने पर स्वयं रक्तदान कर गंभीर मरीजों की जान बचा चुके हैं। अस्पताल में उन्हें जरूरतमंद मरीजों के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले रक्तदाता के रूप में जाना जाता है। महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक की यह वर्षों पुरानी परंपरा रही है कि जब भी किसी मरीज के लिए दुर्लभ रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता, तब ब्लड बैंक के चिकित्सक और कर्मचारी स्वयं आगे आकर लाइव डोनेशन के माध्यम से मरीजों की जान बचाने का प्रयास करते हैं। यही सेवा भावना अस्पताल की कार्यसंस्कृति को विशेष पहचान दिलाती है। रक्तदान के दौरान ब्लड बैंक में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. धर्मवीर बेरवा, भागचंद सोनी, शिवम बंसल तथा महेश मीणा ने मनोज प्रजापत की निस्वार्थ सेवा भावना की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि समय पर किया गया रक्तदान किसी भी जरूरतमंद के लिए सबसे बड़ा जीवनदान होता है। नवजात शिशु के परिजनों ने भावुक होकर मनोज प्रजापत, ब्लड बैंक की पूरी टीम तथा सहयोग सेवार्थ फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समय पर मिले रक्त ने उनके मासूम बच्चे को नया जीवन दिया है, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद और नई सांसें भरने वाला सबसे बड़ा मानवीय कार्य है।

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