राजस्थान

Kota: पांच महिलाओं ने मांगा किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस से इनकार

Kavita2
16 July 2026 10:01 AM IST
Kota: पांच महिलाओं ने मांगा किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस से इनकार
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कोटा : राजस्थान के कोटा जिले में बच्चे के जन्म के बाद किडनी फेलियर की समस्या से जूझ रही पांच महिलाओं ने डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया है। ये महिलाएं अब किडनी ट्रांसप्लांट की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक डायलिसिस के सहारे जीवन जीना उनके लिए कठिन हो गया है और वे स्थायी समाधान के रूप में किडनी प्रत्यारोपण चाहती हैं। इस मामले को लेकर महिलाओं के परिवारों ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर गुहार लगाई है कि यदि सरकार उनके इलाज की उचित व्यवस्था नहीं कर सकती तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।

जानकारी के अनुसार, ये सभी महिलाएं प्रसव के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से गुजर रही हैं। परिजनों का कहना है कि बच्चे के जन्म के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और जांच में किडनी की गंभीर समस्या सामने आई। इसके बाद से उन्हें लगातार चिकित्सा उपचार की आवश्यकता पड़ रही है। परिवारों का आरोप है कि लंबे समय से इलाज के बावजूद उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिल पा रहा है और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

महिलाओं और उनके परिवारों ने जिला प्रशासन के सामने भी अपनी मांग रखी थी। उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट की व्यवस्था कराने के लिए अधिकारियों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। परिवारों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।

परिजनों ने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा है कि वे आर्थिक, मानसिक और शारीरिक रूप से काफी परेशान हो चुके हैं। उनका कहना है कि बीमारी से जूझ रही महिलाओं का जीवन लगातार कठिन होता जा रहा है और उन्हें बेहतर उपचार की आवश्यकता है। परिवारों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर किडनी प्रत्यारोपण की व्यवस्था कराने की मांग की है।

डायलिसिस से इनकार करने के फैसले को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी फेलियर के मरीजों के लिए डायलिसिस एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक प्रक्रिया होती है। जब तक किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो जाता, तब तक डायलिसिस के माध्यम से शरीर से विषैले तत्वों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने में मदद मिलती है। चिकित्सकों के अनुसार, बिना चिकित्सा निगरानी के डायलिसिस छोड़ना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, डोनर की उपलब्धता, चिकित्सा जांच और कानूनी प्रक्रियाओं सहित कई पहलुओं को पूरा करना होता है। इसके लिए मरीज और डोनर दोनों की विस्तृत जांच की जाती है। हालांकि, मरीजों की परेशानी और उनकी मांग को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को उचित परामर्श और सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों ने महिलाओं की स्थिति और इलाज से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों से समन्वय किया जा रहा है।

परिजनों का कहना है कि वे इलाज के लिए कई जगह प्रयास कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली है। उनका कहना है कि वे अपनी मांग को लेकर लगातार अधिकारियों के संपर्क में हैं और चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द कोई ठोस निर्णय ले।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में गंभीर बीमारियों के इलाज, अंग प्रत्यारोपण की उपलब्धता और मरीजों की आर्थिक सहायता को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अस्पतालों की उपलब्धता, डोनर की व्यवस्था और इलाज की लागत जैसी चुनौतियां कई मरीजों और उनके परिवारों के सामने आती हैं।

स्वास्थ्य अधिकारों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को केवल चिकित्सा उपचार ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में प्रशासन, चिकित्सकों और परिवारों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है ताकि मरीजों को उचित इलाज और परामर्श मिल सके।

फिलहाल कोटा की इन पांच महिलाओं का मामला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती बन गया है। परिवारों की ओर से राष्ट्रपति को पत्र भेजकर की गई अपील के बाद अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। महिलाएं किडनी ट्रांसप्लांट की मांग पर कायम हैं, जबकि प्रशासन उनके इलाज और स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आवश्यक कदम उठाने की प्रक्रिया में जुटा है।

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