राजस्थान

Hindustan Zinc, रामपुरा आगुचा की सखी उड़ान समिति की 3200 महिलाओं ने मनाया 7वां वार्षिकोत्सव

Gulabi Jagat
22 Jan 2026 11:16 PM IST
Hindustan Zinc, रामपुरा आगुचा की सखी उड़ान समिति की 3200 महिलाओं ने मनाया 7वां वार्षिकोत्सव
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Bhilwara, भीलवाड़ा। हिन्दुस्तान जिंक सीएसआर के तहत् संचालित प्रमुख सखी प्रोजेक्ट के जरिए ग्रामीण महिलाओं को विकास के केंद्र में रखते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाते हुए विकसित भारत के विजन को मजबूत कर रहा है। यह एक ऐसा आंदोलन है जो जमीनी स्तर पर नेतृत्व, गरिमा और आत्मनिर्भरता को फिर से परिभाषित कर रहा है। हाल ही में, सखी उड़ान समिति ने अपने 7वें फेडरेशन गठन दिवस पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। समिति की महिलाओं ने 7 साल पूरे होने वार्षिकोत्सव मनाया, जिसमें महिलाओं ने अपने गांवों में बदलाव की गवाही देते हुए नेतृत्व किया। विगत 9 वर्षाे से भीलवाड़ा जिले में, सखी प्रोजेक्ट ने 10 ग्राम पंचायतों और 28 गांवों में विशेष रूप से महिलाओं के जीवन को शक्तिशाली तरीके से जीवन को बदला है। महिलाओं के समूहों को मजबूत करने के लिए शुरू हुई पहल आज 300 स्वयं सहायता समूहों के एक इकोसिस्टम में बदल गई है, जिसमें 3,200 से अधिक महिलाएं सखी उड़ान समिति के तहत एकजुट हैं। इन महिलाओं ने वित्तीय अनुशासन और आपसी विश्वास की एक मजबूत नींव बनाई है, जिसमें सामूहिक बचत में 2.26 करोड़ से अधिक जुटाए हैं और 14.90 करोड़ से अधिक के आंतरिक वित्तीय लेनदेन को सक्षम बनाया है। यह बदलाव आत्मविश्वास, दृढ़ विश्वास और ऐसे निर्णय लेने को दर्शाता है जो उनके परिवारों और समुदायों को आकार देते हैं।
हिन्दुस्तान जिं़क की सखी परियोजना मंजरी फाउंडेशन के सहयोग से संचालित है, यह सहयोग समावेश, सशक्तिकरण और सतत विकास के साझा मूल्यों पर आधारित है। सखी महिला उद्यमियों ने किराने की दुकानों, सिलाई केंद्रों, आटा चक्कियों, ब्यूटी पार्लरों, चाय की दुकानों, फल और सब्जियों की दुकानों, कॉस्मेटिक और ज्वेलरी की दुकानों के जरिए स्थायी आजीविका बनाने के लिए कदम बढ़ाया है। इसके अलावा, कई अन्य महिलाओं ने कृषि और पशुपालन के जरिए अपनी आय को मजबूत किया है। ये महिलाएं अब निर्भर नहीं हैं, वे अपने परिवारों के लिए प्रदाता, समर्थक और शक्ति के स्तंभ हैं। मजबूत बैंक लिंकेज के जरिए, 85 स्वयं सहायता समूहों ने 1.99 करोड़ से अधिक के लोन लिए हैं, जिससे महिलाओं को बड़े सपने देखने और स्थायी उद्यम बनाने के लिए सशक्त बनाया गया है। लगातार क्षमता-निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता और नेतृत्व में उनके कौशल को और मजबूत किया है। वर्तमान में, सखी महिलाएं सिर्फ प्रतिभागी नहीं हैं, वे जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली लीडर हैं। वे ग्राम सभा की बैठकों में सक्रिय रूप से अपनी आवाज उठाती हैं, समुदाय की जरूरतों की वकालत करती हैं, सरकारी कल्याण योजनाओं तक पहुँच को आसान बनाती हैं, और पंचायतों के साथ मिलकर काम करती हैं। घरों को बदलने से लेकर गाँव-स्तर के विकास को आकार देने तक, ये महिलाएँ वहाँ प्रगति का नेतृत्व कर रही हैं जहाँ इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। महिला सशक्तिरण का प्रेरणादायक उदाहरण है, सुल्तानपुरा गाँव की आशा देवी, जो 2017 में सखी प्रोजेक्ट से जुड़ीं। इस कार्यक्रम के जरिए, उन्होंने कौशल, आत्मविश्वास और वित्तीय स्वतंत्रता हासिल की। वह 2019 में क्लस्टर-लेवल फेडरेशन की अध्यक्ष बनीं, और 2021 में सरपंच चुनी गईं। तब से उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच और शासन में महिलाओं की भागीदारी में पहल का नेतृत्व किया है। एक गृहिणी से चुनी हुई गाँव की नेता बनने तक का उनका सफर यह दिखाता है कि सखी कैसे जमीनी स्तर पर नेतृत्व को बढ़ावा देती है और सामाजिक और आर्थिक बदलाव लाती है। सखी प्रोजेक्ट के जरिए, हिंदुस्तान जिंक बदलाव की सूत्रधार के रूप में महिलाओं में निवेश करना जारी रखे हुए है, समुदायों को मजबूत कर रहा है, समावेशी विकास को गति दे रहा है, और विकसित भारत के विजन में सार्थक योगदान दे रहा है।
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