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Rajasthan राजस्थान : प्रदेश के सरकारी निजीकरण में स्वयंसेवी विद्वान, दानदाता और 'जनप्रतिनिधियों' चिकित्सा द्वारा उपकरण, उद्यम, फर्नीचर आदि आवश्यकताओं के स्रोत दान किये जाते हैं। लेकिन, चिकित्सा विभाग ने एक आदेश जारी कर कहा कि दान में मिले उपकरण, यात्री और जंगल पर लगने वाला खर्च पांच साल तक संबंधित व्यक्ति या संस्था ही होगा।
इस अजीबो-गरीब ऑर्डर के सामने आने के बाद इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस आदेश की आलोचना करते हुए इसे भामाशाह और दार्शनिक को हतोत्साहित करने वाला आदेश बताया। जूली ने कहा- भाजपा सरकार पूर्व सरकार द्वारा जारी जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने में विफल रही है। सरकार की गलत कंपनियों और कुप्रबंधों के कारण आरजीएचएस, चिरंजीवी और अन्य सामाजिक सुरक्षा समितियां दम तोड़ रही हैं, ऐसे में चिकित्सा विभाग द्वारा नया परीक्षण स्वयंसेवी अध्येताओं, दानदाताओं, भामाशाहों और समर्थकों को हतोत्साहित करने वाला साबित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दान या सेवा, प्रदाताओं की ओर से दिए गए निर्देश, उनकी नौकरियाँ, ऑपरेशन आदि के नाम पर पंजीकृत होना न तो व्यवहारिक है और न ही नैतिक रूप से सही है। विपक्ष के नेता जूली ने बताया कि प्रदेश में 19 हजार से अधिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, जहां समुद्र तट की तुलना में चिकित्सा उपकरण, फर्नीचर आदि आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ऐसे में स्वयंसेवी एसोसिएट्स और डैनसट्रेक्टर द्वारा 50 से अधिक लैबोरेटरी, डायनेमिक सहित अन्य मेडिकल उपकरण डैनसपोर्ट्स को प्राप्त होते हैं, इनीशिएटिव्स को राहत मिलती है। लेकिन, नए बैच में दान स्वीकार करने के लिए 'दान मूर्ति समिति' ने 5 साल तक के लिए मेडिकल उपकरण से दान स्वीकार करने के लिए बनाई गई राशि, स्वामी की स्थिति में वाहन चालक का वेतन और भुगतान पर होने वाली राशि को 5 साल तक के लिए जारी करना ठीक नहीं है।
इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। विपक्ष की नेता जूली ने सरकार से मांग की है कि सरकार की गाड़ी को मिलने वाली राहत में बाधक इस गाड़ी को वापस ले जाए। स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि सरकारी विशेषज्ञ, तकनीशियन, चिकित्सक पर दान में दिए गए मेडिकल उपकरण और एम्बूलेंस तब लगेंगे जब दानदाता अपने 5 साल तक के ऑपरेशन का खर्च उठाने के लिए तैयार हों। यही नहीं, तीर्थयात्रा के लिए कर्मचारियों और ड्राइवरों को पांच साल तक का वेतन भी दान दाता को ही देना होगा।
यदि प्रमुख, बहुसंख्यक अपने भंडार से इन पैकेटों में उपकरण/मशीनें उपलब्ध कराते हैं तो इसके लिए उन्हें आरटीओपी टेक्नोलॉजीज का संचालन करना आवश्यक है। अगर तीर्थयात्री दान में दिया जाता है तो उसके लिए वाहन चालक और डीजल के पांच साल तक का खर्च भी उन्हें ही उठाना होगा। यह आदेश पूर्णतः ग़लत है, जन-निर्माताओं के विरुद्ध चुना गया है। इस आदेश पर दाना दाता खुद के पैसे से दान कर रहे हैं और इस पर भी कार्रवाई की जा रही है। ये बिल्कुल गलत है।
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