राजस्थान

नगर परिषद चुनाव से पहले घमासान तेज

Kavita2
21 Sept 2026 12:24 PM IST
नगर परिषद चुनाव से पहले घमासान तेज
x

जयपुर। राजस्थान के खैरथल-तिजारा नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव से पहले रविवार देर रात सियासी हलचल तेज हो गई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे कांग्रेस समर्थित और निर्दलीय पार्षदों को हरियाणा-हिमाचल सीमा क्षेत्र में पुलिस ने रोक लिया।

कांग्रेस के अनुसार, करीब 18 पार्षदों को पंचकूला के चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास रोके जाने का आरोप है। हालांकि, मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

जानकारी के अनुसार, खैरथल-तिजारा नगर परिषद में सभापति पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस समर्थित पार्षदों की आवाजाही और उनकी सुरक्षा को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

कांग्रेस नेता इमरान खान ने दावा किया कि पार्षदों की बस और करीब आठ अन्य वाहन रविवार रात लगभग 9 बजे सूरजपुर टोल प्लाजा के पास पहुंचे थे। उनका आरोप है कि वहां पहले से पुलिस बल तैनात था और पार्षदों के वाहनों को रोक लिया गया।

इमरान खान के मुताबिक, पुलिस ने पार्षदों को वाहनों से उतारकर पिंजौर थाने ले जाने की कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

कांग्रेस नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि चुनाव से पहले उनके समर्थित पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है।

बताया जा रहा है कि खैरथल-तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

राजनीतिक दल अक्सर निकाय चुनावों में अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रखते हैं। राजस्थान की राजनीति में इसे आमतौर पर ‘बाड़ेबंदी’ के तौर पर देखा जाता है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में मौजूद पार्षद चुनाव से पहले राजस्थान वापस लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उन्हें रोकने का आरोप लगाया गया।

मामले के सामने आने के बाद राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सवाल उठाए हैं और पूरे घटनाक्रम की जानकारी मांगी है।

वहीं, पुलिस की कार्रवाई को लेकर अभी आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। पुलिस की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पार्षदों को किस कारण से रोका गया और उन्हें थाने क्यों ले जाया गया।

सभापति चुनाव को देखते हुए खैरथल-तिजारा में राजनीतिक गतिविधियां पहले से तेज हैं। पार्षदों की संख्या और समर्थन को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं।

नगर परिषद चुनावों में सभापति पद का चुनाव स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। सभापति बनने वाले नेता के पास नगर परिषद के कामकाज और विकास योजनाओं से जुड़े कई अहम अधिकार होते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजर चुनाव प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई पर है। कांग्रेस नेताओं ने मामले को गंभीर बताते हुए आगे की रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है।

फिलहाल खैरथल-तिजारा सभापति चुनाव से पहले सामने आए इस विवाद ने राजस्थान की स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आगे की स्थिति पुलिस और प्रशासन के आधिकारिक रुख के बाद स्पष्ट हो सकेगी।

Next Story