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CBI ने CGST अफसर राठी राम मीणा पर दर्ज की FIR

SHIDDHANT
31 Oct 2025 9:06 PM IST
CBI ने CGST अफसर राठी राम मीणा पर दर्ज की FIR
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छापेमारी
Jaipur जयपुर। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जयपुर के सीजीएसटी (CGST) असिस्टेंट कमिश्नर राठी राम मीणा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का बड़ा मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि मीणा ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जुटाई है। सीबीआई अब उनकी एक-एक संपत्ति, फर्म और बैंक लेन-देन की बारीकी से जांच कर रही है। सीबीआई की एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) के अनुसार, राठी राम मीणा ने अगस्त 2018 से अगस्त 2025 के बीच जयपुर और अहमदाबाद में तैनाती के दौरान अपने और परिवार के नाम पर करीब 2.54 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 100 प्रतिशत अधिक है।
कई फर्जी फर्मों के जरिए काले धन को घुमाने का आरोप
जांच में सामने आया है कि मीणा और उनके परिवार के नाम पर कई फर्म, एलएलपी और कंपनियां रजिस्टर्ड हैं, जिनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं है। सीबीआई का कहना है कि इन फर्मों का इस्तेमाल केवल अवैध रूप से अर्जित धन को घुमाने और छिपाने के लिए किया गया। एजेंसी ने इस घोटाले का खुलासा करते हुए बताया कि फर्जी खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ, जबकि परिवार के पास दर्ज कई संपत्तियों और वाहनों की खरीद में पैसों का स्रोत स्पष्ट नहीं है।
जयपुर, अंकलेश्वर और अहमदाबाद में सीबीआई की छापेमारी
सीबीआई ने तीन शहरों — जयपुर, अंकलेश्वर और अहमदाबाद — में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान जांच टीम को लगभग 35 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, कई अचल संपत्तियों के दस्तावेज, दो बैंक लॉकर, और पोर्शे व जीप कम्पास जैसी लग्जरी गाड़ियां मिलीं। एजेंसी ने अब इन सभी संपत्तियों के वित्तीय स्रोत और फंड फ्लो का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ टीम तैनात की है।
व्यापारियों से रिश्वत लेकर बनाईं संपत्तियां
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि राठी राम मीणा जीएसटी फाइल और रिफंड मामलों में रिश्वत लेकर व्यापारियों से मोटी रकम वसूलते थे। कई व्यापारियों ने बताया कि वे अपने बकाया रिफंड या केस के निपटारे के लिए मजबूरी में पैसे देने को विवश थे। एक व्यापारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “रिफंड को रोका जाता था और काम तभी होता था जब अधिकारी को उसकी कीमत मिल जाती थी।”
सीबीआई की कार्रवाई से व्यापारियों को मिली राहत
व्यापारिक संगठनों ने सीबीआई की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद से कई अधिकारी रिश्वत और वसूली के रैकेट में शामिल रहे हैं। सीबीआई के इस कदम से अब ईमानदार व्यापारियों को राहत मिलेगी। वहीं सीबीआई ने बताया कि बरामद दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो गया है कि मीणा के परिवार के नाम पर दर्ज फर्मों का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। वे केवल “पेपर कंपनियां” थीं, जिनके जरिए अवैध धन को वैध दिखाने का खेल चल रहा था।
आगे की जांच जारी
सीबीआई ने असिस्टेंट कमिश्नर मीणा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही कई और अधिकारियों के नाम भी इस जांच में सामने आ सकते हैं।
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