पंजाब

सस्पेंडेड DIG भुल्लर का CBI के डे-टू-डे ट्रायल विरोध

Ratna Netam
5 May 2026 1:17 PM IST
सस्पेंडेड DIG भुल्लर का CBI के डे-टू-डे ट्रायल विरोध
x
Punjab.पंजाब: हरियाणा के सस्पेंडेड DIG बलबीर भुल्लर और उनके सहयोगियों ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में CBI द्वारा की गई डे-टू-डे ट्रायल अपील का विरोध किया है। अधिकारियों ने बताया कि भुल्लर और उनके सहयोगियों ने कोर्ट में तर्क दिए हैं कि CBI द्वारा ट्रायल प्रक्रिया को तेज करने और रोज़ाना सुनवाई कराने की मांग अनुचित और कानूनी रूप से विवादास्पद है।
CBI ने अदालत से अपील की थी कि इस भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई रोज़ाना की जाए
ताकि मामले की त्वरित निपटारा
हो सके और कानूनी प्रक्रिया में देरी न हो। एजेंसी का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक हित और सरकारी सिस्टम की जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। CBI का यह भी तर्क है कि तेज़ सुनवाई से भ्रष्टाचार में शामिल उच्च पदस्थ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
हालांकि, सस्पेंडेड DIG भुल्लर और उनके सहयोगियों ने अदालत को बताया कि लगातार डे-टू-डे सुनवाई से उनके विधिक अधिकारों का हनन हो सकता है। उनके वकीलों का कहना है कि इतनी त्वरित सुनवाई के कारण उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिलेगा अपनी दलीलों और सबूतों को पेश करने का। वकीलों का यह भी तर्क है कि न्यायिक प्रक्रिया की गति केवल एजेंसी की मांगों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी पक्षों के अधिकारों और निष्पक्ष सुनवाई को ध्यान में रखते हुए ही तय की जानी चाहिए।
सस्पेंडेड DIG भुल्लर का कहना है कि उनका विरोध केवल व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि उन्हें न्याय प्रक्रिया में पूर्ण अवसर दिया जाए और सुनवाई केवल CBI के दबाव में न हो। कोर्ट में पेश दलीलों में यह भी कहा गया कि डे-टू-डे सुनवाई की मांग कानूनी जटिलताओं और तर्कसंगत तैयारी के दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अपीलें आमतौर पर दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। CBI तेजी से सुनवाई की मांग करती है ताकि भ्रष्टाचार के मामलों में देरी न हो और दोषियों को जल्दी सजा मिले। वहीं, आरोपी पक्ष का तर्क होता है कि न्यायिक प्रक्रिया में समय और तैयारी दोनों महत्वपूर्ण हैं ताकि निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
वकीलों ने कहा कि भुल्लर और उनके सहयोगियों का विरोध न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता और सही ढंग से चलने के लिए भी आवश्यक है। उनका कहना है कि अदालत इस मामले में संतुलित निर्णय लें ताकि आरोपी पक्ष और जांच एजेंसी दोनों के अधिकार सुरक्षित रहें।
कोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में डे-टू-डे सुनवाई की मंजूरी या विरोध का निर्णय न्यायिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण होगा और इससे भविष्य में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की प्रक्रिया पर भी असर पड़ेगा।
Next Story