पंजाब
पंजाब विधानसभा में नशे के मुद्दे पर बवाल, कांग्रेस का वॉकआउट, सुखपाल खैहरा निलंबित
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 10:53 PM IST

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चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नशा तस्करी और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी कांग्रेस के विधायकों के बीच जमकर हंगामा हुआ। विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राज्य सरकार पर नशा तस्करी रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया।
कांग्रेस विधायक काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे और अपने साथ 'लानत पत्र' लेकर आए। उन्होंने सदन के वेल में पहुंचकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान आम आदमी पार्टी के विधायकों ने भी जवाबी नारेबाजी की, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया। आखिरकार कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस ने किया हंगामा
शुक्रवार को जैसे ही विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई, कांग्रेस विधायकों ने नशे के कारोबार और प्रदेश की कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया।विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब देने की मांग की।कांग्रेस विधायकों का आरोप था कि प्रदेश में नशे की समस्या लगातार गंभीर बनी हुई है और सरकार इसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है।विधायकों ने नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की।इस दौरान कई कांग्रेस सदस्य विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए।हंगामे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रभावित हुई।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या बना बड़ा मुद्दा
विधानसभा में हंगामे की प्रमुख वजह मानसा जिले में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला रहा।परविंदर सिंह झोटा नशे के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। उनकी 13 अक्टूबर 2026 को हत्या कर दी गई थी।इस घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि नशा तस्करी के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सरकार विफल रही है।विपक्ष ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार को इस मामले में जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।हालांकि, घटना की जांच और आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे विधायक
कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए काले कपड़े और काली पट्टियां पहनीं।उन्होंने 'लानत पत्र' नाम से एक विरोध पत्र भी तैयार किया था।इस पत्र में आम आदमी पार्टी सरकार पर नशा तस्करी, गैंगस्टर गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विफल रहने का आरोप लगाया गया।विपक्षी विधायक चाहते थे कि विधानसभा अध्यक्ष उनका विरोध पत्र स्वीकार करें और इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराई जाए।लेकिन अध्यक्ष की ओर से पत्र स्वीकार नहीं किए जाने के बाद कांग्रेस विधायकों ने विरोध और तेज कर दिया।इसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बाहर जाने का निर्णय लिया।
विधानसभा अध्यक्ष ने की शांति बनाए रखने की अपील
हंगामे के दौरान विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने विधायकों से सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करने की अपील की।उन्होंने सदस्यों को अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और निर्धारित नियमों के अनुसार मुद्दे उठाने के लिए कहा।हालांकि, कांग्रेस विधायक अपनी मांगों पर अड़े रहे।विपक्ष का कहना था कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता की हत्या जैसे गंभीर मामले पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।लगातार नारेबाजी के कारण सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती रही।अंततः कांग्रेस विधायकों ने सुबह करीब 10 बजकर 34 मिनट पर सदन से वॉकआउट कर दिया।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कांग्रेस पर किया पलटवार
कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने विपक्ष पर निशाना साधा।उन्होंने कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा से जुड़े पुराने नशा मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की आलोचना की।चीमा ने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया और विपक्ष से जवाब मांगा।इसके अलावा उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह के शिरोमणि अकाली दल से पुराने राजनीतिक संबंधों का जिक्र किया।वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की समस्या पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान गंभीर हुई थी।इस पर कांग्रेस के विधायकों ने भी जवाबी नारेबाजी की।दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के कारण सदन में तनाव बढ़ता गया।
सुखपाल सिंह खैहरा पूरे सत्र के लिए निलंबित
शुक्रवार को हुए हंगामे के बाद कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उनके निलंबन का प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया।प्रस्ताव में खैहरा पर विधानसभा अध्यक्ष के प्रति असंसदीय भाषा के इस्तेमाल, आसन के निर्देशों की अवहेलना और सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया गया।इसके बाद सदन ने उन्हें मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया।यह प्रस्ताव विपक्षी विधायकों की अनुपस्थिति में पारित हुआ।खैहरा का निलंबन भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच नए राजनीतिक टकराव का विषय बन गया है।
विधानसभा के बाहर भी कांग्रेस का प्रदर्शन
सदन से वॉकआउट करने के बाद कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन जारी रखा।विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ नारे लगाए।परगट सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कई गंभीर समस्याएं हैं, लेकिन सरकार विधानसभा में इन पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराना चाहती।उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और सरकार से जवाब मांगने का महत्वपूर्ण मंच होता है।कांग्रेस नेताओं ने नशे के खिलाफ कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
पहले दिन केवल दस मिनट चली थी कार्यवाही
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन गुरुवार को भी विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की थी।हालांकि, पहले दिन सदन की कार्यवाही लगभग दस मिनट के भीतर समाप्त हो गई थी।कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।पहले दिन कांग्रेस और भाजपा दोनों ने नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मुद्दा उठाया था।इसके बाद शुक्रवार को यह मामला सदन में बड़े राजनीतिक टकराव का कारण बन गया।विपक्ष ने कहा कि विधानसभा सत्र में जनता से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।
पंजाब की राजनीति में फिर गरमाया नशे का मुद्दा
पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी और युवाओं पर उसके प्रभाव को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है।आम आदमी पार्टी सरकार ने नशा तस्करी के खिलाफ अभियान को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि सरकारी दावों के बावजूद जमीन पर अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या ने अब इस विवाद को और गंभीर बना दिया है।राजनीतिक दलों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और नशा तस्करी रोकने के प्रभावी उपाय करना महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
27 अक्टूबर तक चलेगा विधानसभा सत्र
पंजाब विधानसभा का मौजूदा सत्र 22 अक्टूबर से शुरू हुआ है और इसका समापन 27 अक्टूबर को निर्धारित है।सत्र के आगामी दिनों में भी नशे, कानून-व्यवस्था और परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर राजनीतिक टकराव जारी रह सकता है।कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगती रहेगी।वहीं, सत्ता पक्ष ने भी विपक्ष के आरोपों का राजनीतिक और सदन के भीतर जवाब देने का रुख अपनाया है।
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