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हरियाणा में नशा तस्करों पर शिकंजा, 6824 गिरफ्तार, 19 करोड़ की संपत्ति जब्त
Rajeshwari Nishad
23 Oct 2026 10:36 PM IST

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चंडीगढ़। हरियाणा में नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस और हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (HSNCB) ने बड़ी कार्रवाई की है। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच प्रदेश में नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में 6,824 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा तस्करी से संबंधित 113 मामलों में 19.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं। पिछले साल इसी अवधि में 5.92 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच हुई थीं। इस प्रकार संपत्ति कुर्की के मूल्य में लगभग 230 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ये आंकड़े शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित 14वीं राज्य स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) समिति की समीक्षा बैठक में प्रस्तुत किए गए। बैठक में नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, अवैध कमाई की पहचान, अपराधियों को सजा दिलाने और नशा मुक्ति से संबंधित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।
नौ महीने में दर्ज हुए 3,809 मामले
हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजय कुमार ने बैठक में बताया कि प्रदेश में नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज की जा रही है।जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस यानी एनडीपीएस अधिनियम के तहत कुल 3,809 मामले दर्ज किए गए।इसी अवधि में 6,824 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।वर्ष 2025 के शुरुआती नौ महीनों में 2,722 मामले दर्ज हुए थे और 5,393 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।इस प्रकार मामलों की संख्या में 39.93 प्रतिशत और गिरफ्तारियों में 26.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।हालांकि, मामलों और गिरफ्तारियों में बढ़ोतरी से अकेले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नशा तस्करी उसी अनुपात में बढ़ी है। इसमें पुलिस की निगरानी और प्रवर्तन गतिविधियों की तीव्रता का भी योगदान हो सकता है।
19.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच
नशा तस्करी से जुड़े कथित आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने के लिए पुलिस ने संपत्तियों पर कार्रवाई तेज की है।वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में 113 मामलों में 19.52 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अटैच की गईं।वहीं, पिछले वर्ष इसी अवधि में 49 मामलों में 5.92 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच हुई थीं।इस प्रकार संपत्ति अटैच करने वाले मामलों की संख्या में 130.61 प्रतिशत और संपत्तियों के मूल्य में 229.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।इसके अलावा संपत्ति कुर्की से प्रभावित व्यक्तियों की संख्या 78 से बढ़कर 163 पहुंच गई है।अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी से होने वाली कथित अवैध कमाई के स्रोतों का पता लगाना है।
71 ड्रग कार्टेल की पहचान
हरियाणा पुलिस ने प्रदेश में सक्रिय बताए जा रहे 71 ड्रग कार्टेल की पहचान की है।इन गिरोहों के कथित नेटवर्क को तोड़ने के लिए अलग-अलग स्तरों पर जांच की जा रही है।अधिकारियों का ध्यान केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी पर नहीं, बल्कि तस्करी से होने वाली कमाई और उससे जुड़े लोगों की पहचान पर भी है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नशीले पदार्थों की सप्लाई किन माध्यमों से होती है और उससे अर्जित धन कहां पहुंचता है।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संगठित तस्करी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे की पहचान करना अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हेरोइन की बरामदगी लगभग दोगुनी
नशा तस्करी के खिलाफ अभियान के दौरान विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों की बरामदगी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।वर्ष 2025 के शुरुआती नौ महीनों में हरियाणा में 43.176 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी।वहीं, जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान यह मात्रा बढ़कर 84.695 किलोग्राम हो गई।इस प्रकार हेरोइन की बरामदगी में 96.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।अफीम की बरामदगी भी 235.550 किलोग्राम से बढ़कर लगभग 430.3 किलोग्राम पहुंच गई।इसके अलावा कोकीन की बरामदगी लगभग 2.96 किलोग्राम और एमडी/एमडीएमए की बरामदगी लगभग 1.76 किलोग्राम रही।ये आंकड़े नशीले पदार्थों के खिलाफ बढ़ती प्रवर्तन गतिविधियों को दर्शाते हैं।
व्यावसायिक मात्रा वाले मामलों में भी वृद्धि
बैठक में बताया गया कि व्यावसायिक मात्रा में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की संख्या भी बढ़ी है।पिछले वर्ष जनवरी से सितंबर के दौरान ऐसे 346 मामले दर्ज हुए थे।इस वर्ष समान अवधि में यह संख्या बढ़कर 380 हो गई।इस श्रेणी में लगभग 9.83 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।वहीं, मध्यवर्ती मात्रा से जुड़े मामलों की संख्या 1,887 से बढ़कर 2,844 पहुंच गई।अधिकारियों के अनुसार, बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में आर्थिक जांच को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी पर नजर
पुलिस अब नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल माध्यमों की भी निगरानी बढ़ा रही है।डार्क वेब, सोशल मीडिया और क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल के लिए विशेष तकनीकी क्षमता विकसित की जा रही है।हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुख्यालय में वित्तीय जांच प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है।इसका उद्देश्य संदिग्ध आर्थिक लेन-देन, अवैध कमाई और उससे खरीदी गई संपत्तियों की पहचान करना है।इस कार्य के लिए 139 पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।
30 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्की का लक्ष्य
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक नशा तस्करी से संबंधित 30 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अटैच करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।सितंबर तक 19.52 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की जा चुकी थीं।इसके अलावा लगभग 15.09 करोड़ रुपये की संपत्तियों से संबंधित प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन हैं।हालांकि, प्रस्तावित संपत्तियों को अंतिम मंजूरी मिलने से पहले कुर्क घोषित नहीं किया जा सकता।सरकार का उद्देश्य तस्करी से जुड़े कथित अवैध आर्थिक लाभ को रोकना और संगठित नेटवर्क पर दबाव बनाना है।
दोषसिद्धि दर में भी सुधार
नशा तस्करी के मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन प्रक्रिया को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, एनडीपीएस मामलों में दोषसिद्धि दर बढ़कर 58.34 प्रतिशत हो गई है।अधिकारियों ने 50 महत्वपूर्ण मामलों की विशेष निगरानी करने की बात कही है।इनमें एक मामले में दोषी को 14 वर्ष के कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने संबंधित विभागों को जांच, अभियोजन और पुनर्वास से जुड़े कार्यों में बेहतर समन्वय रखने के निर्देश दिए।
नशा मुक्ति और जागरूकता पर भी जोर
प्रदेश सरकार ने नशा तस्करी पर कार्रवाई के साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास को भी महत्वपूर्ण बताया है।बैठक में राज्य के 127 नशा मुक्ति केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत पंजीकरण व्यवस्था से जोड़ने के प्रस्ताव की समीक्षा हुई।इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों में नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।अधिकारियों का कहना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए कानून लागू करने के साथ उपचार, परामर्श और सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
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