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फतेहगढ़ साहिब में एकादशी को रावण दहन
फतेहगढ़ साहिब: पंजाब के चनारथल कलां गांव में रावण दहन विजयादशमी के अगले दिन एकादशी को होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 165 वर्ष पुरानी इस परंपरा में लोहे के स्थायी रावण के मुकुट पर कागज की टोपी और एक पटाखा लगाकर प्रतीकात्मक रस्म निभाई जाती है। इसका खर्च लगभग एक हजार रुपये बताया गया है।
ग्रामीणों की प्रचलित कथा के मुताबिक, वर्ष 1861 में दशहरे पर लगभग 400 पशु चरने के दौरान गायब हो गए थे। अगले दिन उनके सुरक्षित लौटने की खुशी में एकादशी को उत्सव मनाया गया। इसके बाद यही परंपरा चल पड़ी। यह विवरण स्थानीय मौखिक इतिहास पर आधारित है।
रामलीला कमेटी अष्टमी की रात से झांकियां निकालती है। नवमी से खेल मेला शुरू होता है और एकादशी को समापन होता है। झांकियां और रावण तैयार करने में एक परिवार कई पीढ़ियों से निशुल्क सेवा दे रहा है।
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