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Punjab.पंजाब: पंजाब की नई फार्म स्टे पॉलिसी को लेकर पर्यावरणविदों में गंभीर चिंता पैदा हो गई है। ग्रीन एक्टिविस्टों का कहना है कि यह नीति नाजुक शिवालिक बेल्ट में फार्महाउसों और अन्य निजी विकास के लिए ‘बैकडोर’ खोल सकती है, जिससे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन खतरे में पड़ सकता है।
शिवालिक क्षेत्र, जो अपने हरे-भरे जंगलों और संवेदनशील पारिस्थितिकी के लिए जाना जाता है, कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि फार्म स्टे पॉलिसी के तहत इस इलाके में पर्यटन और फार्महाउस के लिए अनुमति मिलने से वन और जमीन पर दबाव बढ़ सकता है।
ग्रीन एक्टिविस्टों का कहना है कि नीति में कुछ खामियां हैं, जो डेवलपर्स और निजी व्यक्तियों को सीमित सरकारी निगरानी में फार्महाउस बनाने की अनुमति दे सकती हैं। उनका कहना है कि यह पर्यावरण और स्थानीय समुदाय के लिए लंबे समय में नुकसानदायक साबित हो सकता है।
एक वरिष्ठ ग्रीन एक्टिविस्ट ने कहा, “फार्म स्टे पॉलिसी का मकसद ग्रामीण पर्यटन और कृषि आधारित अनुभव को बढ़ावा देना है, लेकिन शिवालिक बेल्ट जैसी संवेदनशील पारिस्थितिकी वाले क्षेत्रों में इसे लागू करना जोखिम भरा है। अगर सही निगरानी और स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं रखे गए, तो यह नीति वन-भूमि पर दबाव और अवैध निर्माण को बढ़ावा दे सकती है।”
सरकारी सूत्रों का कहना है कि फार्म स्टे पॉलिसी का उद्देश्य राज्य के ग्रामीण इलाकों में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देना है। सरकार का कहना है कि नीति के अंतर्गत सभी निर्माण और संचालन पर्यावरण नियमों और स्थानीय निकायों की मंजूरी के अधीन होंगे।
हालांकि, पर्यावरणविदों का तर्क है कि नीति में निहित नियमों का पालन सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना है कि विशेष रूप से नाजुक शिवालिक बेल्ट में कानूनों की अवहेलना और भूमि का अनुचित उपयोग होने की आशंका अधिक है।
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने भी इस नीति पर अपनी mixed प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों का कहना है कि इससे ग्रामीण पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जबकि अन्य ने कहा कि यह उनके प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक जीवनशैली के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि नीति को लागू करने से पहले शिवालिक बेल्ट के लिए विशेष गाइडलाइन और पर्यावरणीय मूल्यांकन (Environmental Impact Assessment) अनिवार्य किया जाए। इससे फार्म स्टे पॉलिसी का लाभ उठाने के साथ-साथ पर्यावरण सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
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