पंजाब

पंजाब मंत्री अरोड़ा को कोर्ट से ED कस्टडी मिली

Ratna Netam
11 May 2026 12:58 PM IST
पंजाब मंत्री अरोड़ा को कोर्ट से ED कस्टडी मिली
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Punjab.पंजाब: पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को मंगलवार को अदालत ने गंभीर आरोपों के तहत 7 दिन की ईडी (Enforcement Directorate) कस्टडी में भेज दिया। यह आदेश वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच के सिलसिले में दिया गया। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने संजीव अरोड़ा के खिलाफ कई गंभीर आरोपों की जांच शुरू की है, जिसमें अवैध लेनदेन और धन के स्रोत को छुपाने का संदेह शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि जांच से जुड़े दस्तावेज़ और बैंक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण सबूत के रूप में सामने आए हैं।
कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि अरोड़ा की कस्टडी की अवधि सात दिन के लिए होगी, ताकि जांच एजेंसी उनसे विस्तृत पूछताछ कर सके और मामले की गहराई तक जा सके। अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि जांच एजेंसी इस अवधि में उनके अधिकारों और सम्मान का ध्यान रखे। संजेव अरोड़ा के समर्थकों का कहना है कि मंत्री ने हमेशा पारदर्शिता और नियमों के पालन का समर्थन किया है और यह मामला राजनीतिक विरोध या अभियान का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, ईडी और संबंधित अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी तरह से कानूनी और साक्ष्यों पर आधारित है।
राजनीतिक गलियारे में यह घटना चर्चा का केंद्र बन गई है। विपक्षी दलों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे पंजाब में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का सकारात्मक उदाहरण बताया। वहीं, अरोड़ा की पार्टी ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया और कहा कि मंत्री के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई केवल उनकी छवि को प्रभावित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में आगे की पूछताछ और सबूतों की समीक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका राजनीतिक और प्रशासनिक असर दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है।
संजेव अरोड़ा को ईडी की कस्टडी में भेजे जाने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि मंत्री के साथ-साथ जांच प्रक्रिया भी पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी रखी जाएगी।
स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर बहस जारी है। लोग इस घटना को पंजाब की राजनीति और भ्रष्टाचार नियंत्रण के दृष्टिकोण से जोड़कर देख रहे हैं। कई लोग इसे एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक मतभेद और चुनावी रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
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