पंजाब

Punjab: नवरूप कौर ने उम्र और सामाजिक रिवाजों को चुनौती दी

Ratna Netam
5 May 2026 1:23 PM IST
Punjab: नवरूप कौर ने उम्र और सामाजिक रिवाजों को चुनौती दी
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Punjab.पंजाब: 80 वर्षीय नवरूप कौर ने उम्र और सामाजिक परंपराओं की परवाह किए बिना खेती के क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है। उन्होंने 28 एकड़ जमीन पर अपनी मेहनत और उत्साह से खेती का काम शुरू किया, और इस परंपरा को तोड़ा कि खेती केवल पुरुषों का क्षेत्र है। नवरूप कौर का यह कदम ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। नवरूप कौर का कहना है कि उम्र कभी भी किसी काम में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने बताया, “जब तक हाथ में शक्ति है और दिल में जुनून है, तब तक कोई भी कार्य कठिन नहीं लगता। मैंने हमेशा से खेती में रुचि रखी है और अब अपनी जमीन पर काम करके खुद को सशक्त महसूस कर रही हूँ।”
नवरूप कौर ने 28 एकड़ जमीन पर विविध फसलें उगाई हैं। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल किया, जिससे फसल की पैदावार में वृद्धि हुई। उनके प्रयासों से यह साबित हुआ कि अनुभव और मेहनत का मेल किसी भी उम्र में सफलता दिला सकता है। नवरूप कौर ने बताया कि शुरुआत में लोग उन्हें लेकर संदेह जताते थे, लेकिन अब उनकी मेहनत और समर्पण सभी के लिए प्रेरणादायक बन गया है। स्थानीय समाजसेवी और किसानों के अनुसार, नवरूप कौर ने न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए उदाहरण पेश किया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को अपने अधिकारों और क्षमता पर विश्वास होना चाहिए। नवरूप कौर की मेहनत और साहस ने यह दिखाया कि पारंपरिक सोच को तोड़कर भी सफलता हासिल की जा सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नवरूप कौर की पहल से यह स्पष्ट होता है कि महिलाएं आधुनिक तकनीक और परंपरागत ज्ञान का मिश्रण करके बड़े पैमाने पर खेती कर सकती हैं। इससे न केवल पैदावार बढ़ेगी बल्कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। नवरूप कौर का उदाहरण ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। उनका कहना है कि अगर इच्छाशक्ति और मेहनत हो, तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि उम्र केवल एक संख्या है, और वास्तविक शक्ति साहस और लगन में होती है। गांव के लोग नवरूप कौर की मेहनत की सराहना कर रहे हैं। उनके खेत में रोजाना कई लोग आते हैं, सीखने और खेती के नए तरीके जानने के लिए। नवरूप कौर ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव की शुरुआत कभी भी किसी उम्र में की जा सकती है और यह समाज के लिए मिसाल बन सकता है।
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