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पंजाब चुनाव 2024, AAP में नेता बदल रहे हैं, बीजेपी का 'मिशन पंजाब' असरदार

Ratna Netam
25 April 2026 12:47 PM IST
पंजाब चुनाव 2024, AAP में नेता बदल रहे हैं, बीजेपी का मिशन पंजाब असरदार
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Punjab.पंजाब: पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) में दलबदल की खबरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दलबदल के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ‘मिशन पंजाब’ है, जो बीजेपी को राज्य में चुनावी बढ़त दिलाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
हाल ही में कई AAP नेताओं ने पार्टी छोड़ने या अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क बनाने की खबरें दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह पलायन केवल व्यक्तिगत कारणों से नहीं, बल्कि संगठनात्मक मतभेद और केंद्रीय स्तर से चल रही राजनीतिक रणनीति का परिणाम है। BJP सूत्र भी मान रहे हैं कि यह उनका अप्रत्यक्ष प्रयास है, जो AAP के भीतर असंतोष को बढ़ावा दे रहा है।
AAP के वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कुछ नेता अब पार्टी के फैसलों और रणनीति से असंतुष्ट हैं। इसके साथ ही बीजेपी की सक्रिय भूमिका और 'मिशन पंजाब' के तहत चल रही योजनाओं ने कुछ नेताओं के फैसलों को प्रभावित किया है। आने वाले दिनों में और भी लोग बाहर जा सकते हैं।”
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अमित शाह का ‘मिशन पंजाब’ बीजेपी को राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए व्यापक रणनीति के तहत किया जा रहा है। इसमें केवल प्रचार और उम्मीदवार चयन ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों के भीतर मतभेद को भड़का कर उन्हें कमजोर करना भी शामिल है। AAP में लगातार दलबदल और असंतोष के संकेत इस रणनीति को पुष्ट कर रहे हैं।
AAP ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया जारी है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “हमारे पास किसी भी तरह की दलबदल की समस्या नहीं है। जो नेता अपने व्यक्तिगत कारणों से पार्टी छोड़ते हैं, वह किसी भी रणनीति का हिस्सा नहीं हैं। AAP मजबूत और संगठनात्मक रूप से चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है।”
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AAP में नेताओं के बाहर जाने से पार्टी की चुनावी स्थिति प्रभावित हो सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पार्टी ने पिछले चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था। वहीं, BJP इस अवसर का लाभ उठाने के लिए सक्रिय दिख रही है।
AAP के अंदर से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ नेता पहले ही निजी तौर पर अन्य दलों से संपर्क कर चुके हैं। पार्टी नेतृत्व के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है, क्योंकि उन्हें संगठन की एकजुटता और चुनावी रणनीति दोनों को संतुलित करना होगा।
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