पंजाब
Punjab and Haryana HC ने पत्नी और बच्चों का भत्ता बरकरार रखा
Ratna Netam
5 May 2026 1:10 PM IST

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Punjab.पंजाब: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि पति को अपनी पत्नी और बच्चों के लिए गुज़ारा भत्ता देना अनिवार्य है। अदालत ने वादियों को सख्त चेतावनी दी है और कहा कि भविष्य में अगर इस आदेश का पालन नहीं किया गया तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने पिछले निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति को अपनी पत्नी और बच्चों को नियमित भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।
मामले में पत्नी ने दावा किया था कि उनका पति भत्ता भुगतान नहीं कर रहा है और इसके कारण उन्हें और बच्चों को अपने रोज़मर्रा के खर्चों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अदालत से गुज़ारा भत्ता सुनिश्चित करने की अपील की थी। इसके बाद निचली अदालत ने भी पति को भत्ता देने का आदेश दिया था, लेकिन पति ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दी थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि परिवार की भलाई और बच्चों की आवश्यकताओं की रक्षा करना न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति की कोई भी आक्षेप या बहाना स्वीकार्य नहीं है अगर उसका पालन न किया जाए। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भत्ता सिर्फ वित्तीय सहायता नहीं है बल्कि यह बच्चों और पत्नी के जीवन का आवश्यक हिस्सा है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को गंभीरता से सुना। अदालत ने पति से पूछा कि क्यों उन्होंने पिछले आदेश का पालन नहीं किया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में भत्ता भुगतान में कोई देरी या अवहेलना हुई, तो पति पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना या अन्य कानूनी प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं और बच्चों की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करना न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि विवाह के दौरान पति की जिम्मेदारी केवल भावनात्मक समर्थन तक सीमित नहीं होती, बल्कि वित्तीय जिम्मेदारियों का पालन भी अनिवार्य है।
फैसले के बाद वकीलों ने कहा कि यह निर्णय महिला अधिकारों और बच्चों के भले के दृष्टिकोण से अहम है। इससे यह संदेश जाता है कि अदालतें किसी भी स्थिति में महिलाओं और बच्चों की आर्थिक सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करेंगी। इस निर्णय से समाज में परिवार के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, गुज़ारा भत्ता केवल पारिवारिक विवाद का मामला नहीं है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य और शिक्षा, स्वास्थ्य और सामान्य जीवन जीने के अधिकार से जुड़ा है। हाईकोर्ट का यह फैसला अन्य अदालतों और संबंधित पक्षों के लिए मिसाल के रूप में देखा जा सकता है।
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