पंजाब
Punjab: अवैध रिसॉर्ट मामले में कार्रवाई की मांग, जंगल के क्षेत्र में अवैध निर्माण
Ratna Netam
24 April 2026 2:15 PM IST

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Punjab.पंजाब: राज्य में प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना करते हुए जंगल की जमीन पर अवैध रिसॉर्ट चलने की खबर सामने आई है। स्थानीय अधिकारियों और वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यह रिसॉर्ट संरक्षित जंगल क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है, जबकि पहले से ही इसे बंद करने के आदेश जारी किए गए थे।
जंगल क्षेत्र में यह रिसॉर्ट न केवल पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि वन्य जीवों और जैव विविधता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अवैध रिसॉर्ट के संचालन के कारण आसपास के क्षेत्र में पेड़ों की कटाई, जल स्रोतों का दुरुपयोग और कचरा फैलने जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की अनदेखी पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जंगल और वन्य क्षेत्र को सुरक्षित रखना न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले भी रिसॉर्ट संचालकों को अवैध निर्माण और संचालन रोकने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। बावजूद इसके, रिसॉर्ट अभी भी संचालन में है और इसमें पर्यटक तथा अन्य आगंतुक आने-जाने लगे हैं। अधिकारी ने कहा कि यह प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना है और इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगल और संरक्षित क्षेत्रों में इस तरह के अवैध रिसॉर्ट्स पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन को तत्काल प्रभावी कदम उठाकर अवैध निर्माण को रोकना चाहिए और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में कहा कि उन्हें शिकायतें मिली हैं और वे स्थिति का आकलन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जल्द ही वन विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर रिसॉर्ट को बंद करने और इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएंगे।
स्थानीय समाज और पर्यावरण संगठनों ने भी इस मामले पर आवाज उठाई है। उन्होंने वन विभाग और प्रशासन से आग्रह किया है कि जंगल की भूमि पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण रोकने के लिए सख्त कदम उठाएँ। उनका कहना है कि पर्यावरण की सुरक्षा में ढील देना भविष्य में गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।
यह मामला राज्य में अवैध निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करता है। यह दिखाता है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है; प्रशासनिक निगरानी और समय पर कार्रवाई भी जरूरी है।
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