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Punjab: कनाडा के 65% सिखों ने अनुभव की बढ़ती नफ़रत, रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े

Payal
24 April 2026 1:58 PM IST
Punjab: कनाडा के 65% सिखों ने अनुभव की बढ़ती नफ़रत, रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े
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Punjab.पंजाब: कनाडा में सिख-कनाडाई समुदाय को बढ़ती नफ़रत और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में जारी हुई एक नई रिपोर्ट में यह सामने आया है कि करीब 65 प्रतिशत सिख-कनाडाई लोगों ने अपने जीवन में किसी न किसी रूप में नफ़रत या भेदभाव का अनुभव किया है। यह आंकड़ा समुदाय और सरकार दोनों के लिए चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सिख-कनाडाई अक्सर सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव का सामना कर रहे हैं। इसका असर उनकी मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। कई लोग दैनिक जीवन में अपने धर्म और पहचान को लेकर असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक मीडिया पर भी समुदाय के खिलाफ नफ़रत फैलाने वाले संदेश और टिप्पणियाँ बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ती नफ़रत केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने सरकार और सामुदायिक संगठनों से आह्वान किया है कि वे इस पर ठोस कदम उठाएं और नफ़रत को रोकने के लिए जागरूकता और सुरक्षा उपाय बढ़ाएँ।
कनाडा के कई शहरों में सिखों के खिलाफ हिंसक घटनाओं और घृणा अपराधों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले तीन महीनों में ही कई सिख-कनाडाई नागरिकों ने पुलिस को इस तरह के मामलों की सूचना दी है। इसके साथ ही, समुदाय के नेताओं ने यह भी कहा कि उन्हें कई बार सरकारी संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।
सिख-कनाडाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अपने धर्म और संस्कृति के प्रति गर्व महसूस करते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती नफ़रत और घृणा उनके जीवन को चुनौतीपूर्ण बना रही है। उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन से अपील की है कि वे नफ़रत को रोकने और समुदाय को सुरक्षित रखने के लिए कठोर कदम उठाएँ।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों की शुरुआत की जाए। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी को विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सकता है और नफ़रत फैलाने वाले विचारों को कम किया जा सकता है।
समाजशास्त्रियों का कहना है कि नफ़रत और भेदभाव का यह बढ़ता ट्रेंड सिर्फ कनाडा में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में कई बहुसांस्कृतिक समाजों में देखा जा रहा है। ऐसे में सरकार, समुदाय और नागरिकों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत है।
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