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Punjab : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 वर्षीय शवन सिंह की सेवा की कहानी ने दिल जीता

Kavita2
7 May 2026 2:47 PM IST
Punjab : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 11 वर्षीय शवन सिंह की सेवा की कहानी ने दिल जीता
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Punjab पंजाब: पंजाब के फिरोजपुर जिले के भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे तरनवाली गांव के 11 वर्षीय शवन सिंह की एक छोटी सी पहल अब एक प्रेरणादायक कहानी के रूप में सामने आई है। यह घटना उस समय की बताई जाती है जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य गतिविधियाँ बढ़ गई थीं।

जानकारी के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले जब भारत-पाक सीमा पर तनाव का माहौल था और सेना की तैनाती बढ़ाई गई थी, तब शवन सिंह ने अपने गांव में तैनात भारतीय सेना के जवानों की मदद करने का निर्णय लिया। वह बिना किसी आग्रह या निर्देश के अपने घर से सैनिकों के लिए चाय, पानी, दूध और लस्सी लेकर पहुंचने लगे।

शवन सिंह का कहना है कि उन्होंने यह कदम अपने मन से उठाया। उनके अनुसार, जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ और सैनिक उनके गांव में आए, तो उन्हें लगा कि जवान देश की सुरक्षा के लिए वहां मौजूद हैं और ऐसे में उनकी सेवा करना उनका कर्तव्य है। इसी भावना के चलते उन्होंने रोजमर्रा की जरूरत की कुछ चीजें सैनिकों तक पहुंचानी शुरू कीं।

गांव के सीमावर्ती क्षेत्र में सेना की मौजूदगी के दौरान शवन अक्सर अपने घर से छोटे-छोटे बर्तनों में चाय और दूध लेकर निकलते थे और जवानों को देते थे। कई बार वह पानी और स्थानीय रूप से बनाई गई लस्सी भी लेकर जाते थे। उनकी यह आदत धीरे-धीरे वहां तैनात सैनिकों के बीच भी पहचानी जाने लगी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस छोटे बच्चे की यह पहल किसी भी दबाव या निर्देश का हिस्सा नहीं थी, बल्कि पूरी तरह से उसकी अपनी समझ और भावनाओं पर आधारित थी। गांव में रहने वाले लोग बताते हैं कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बच्चों का सेना के प्रति लगाव सामान्य बात है, लेकिन शवन की नियमित सेवा ने इसे एक अलग पहचान दी।

ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह के मौके पर शवन सिंह ने इस अनुभव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपने दिल की सुनी थी। उन्होंने बताया कि उन्हें उस समय यह महसूस हुआ कि जो सैनिक उनके गांव में देश की सुरक्षा के लिए मौजूद हैं, उनके लिए कुछ करना चाहिए।

यह कहानी अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर चर्चा का विषय बन गई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों और सेना के बीच संबंधों की एक सरल और भावनात्मक तस्वीर के रूप में इसे देखा जा रहा है। विशेषकर 11 साल के बच्चे की यह पहल लोगों को यह संदेश देती है कि छोटे प्रयास भी बड़े भाव पैदा कर सकते हैं।

गांव के लोग भी इस बात पर गर्व महसूस कर रहे हैं कि उनके बीच से एक बच्चे ने बिना किसी स्वार्थ के सेना की सेवा की भावना दिखाई। यह घटना अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे देशभक्ति की एक सरल मिसाल के रूप में देख रहे हैं।

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