पंजाब
जाब CM भगवंत मान के कैंप ऑफिस पर CBI की छापेमारी से सियासी घमासान
Ratna Netam
8 Oct 2026 6:36 PM IST

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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप कार्यालय पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की छापेमारी के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता परगट सिंह ने बुधवार, 7 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब में हालात इतने खराब हो गए हैं कि मुख्यमंत्री के कार्यालय में केंद्रीय जांच एजेंसी को तलाशी लेनी पड़ी। उन्होंने आम आदमी पार्टी को उसके भ्रष्टाचार विरोधी वादों की याद दिलाते हुए कहा कि जिस पार्टी ने लोकपाल लाने और भ्रष्टाचार खत्म करने के नाम पर सत्ता हासिल की थी, आज उसी सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच हो रही है।समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में कांग्रेस नेता परगट सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पंजाब की वर्तमान स्थिति सरकार की जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। परगट सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय पर सीबीआई की कार्रवाई राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय है।
परगट सिंह ने कहा, "AAP लोकपाल के वादे पर सत्ता में आई थी, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि CM के ऑफिस पर रेड पड़ी है। इससे बुरा और कुछ नहीं हो सकता।"कांग्रेस नेता ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपनी राजनीतिक पहचान भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के आधार पर बनाई थी। पार्टी ने जनता से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का वादा किया था। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय से संबंधित व्यक्तियों पर भ्रष्टाचार के आरोप और केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।दरअसल, सीबीआई ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को पंजाब और चंडीगढ़ में आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इनमें चंडीगढ़ के सेक्टर-2 में स्थित मुख्यमंत्री भगवंत मान का कैंप कार्यालय भी शामिल था। इसके अलावा मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुमन और अन्य संबंधित व्यक्तियों से जुड़े ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।
यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देश के बाद की गई। अदालत ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कुछ व्यक्तियों के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच करने का आदेश दिया था। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कुछ ऐसे तथ्य और आरोप सामने आए थे, जिनके आधार पर आगे जांच की आवश्यकता जताई गई।सीबीआई ने इस मामले में राजबीर सिंह घुमन सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर और आरएस नागरा के नाम शामिल हैं। जांच एजेंसी कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों की नियुक्तियों और तबादलों, अनुकूल टेंडर दिलाने तथा प्रभाव का इस्तेमाल करके अनुचित लाभ पहुंचाने से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है।
जांच से जुड़े आरोपों के अनुसार, कुछ व्यक्तियों ने सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। हालांकि, ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं। किसी आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने या उसके ठिकानों पर छापेमारी होने का अर्थ यह नहीं है कि उसका अपराध सिद्ध हो गया है।पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 5 अक्टूबर को मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मामले की अगली समीक्षा 7 दिसंबर को निर्धारित की गई है। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सीबीआई की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। मान ने कहा कि पंजाब में चुनाव नजदीक आने के कारण उनकी सरकार को निशाना बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार किसी जांच से नहीं डरती। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी को छापेमारी के दौरान कोई आपत्तिजनक सामग्री मिली है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मान के अनुसार, सीबीआई की तलाशी के दौरान ऐसा कुछ नहीं मिला, जिससे उनकी सरकार के खिलाफ आरोप साबित होते हों।हालांकि, तलाशी के परिणाम को लेकर मुख्यमंत्री का यह दावा है। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा।आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की प्रतिक्रियाओं ने इस मामले को राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बना दिया है। जहां कांग्रेस मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े आरोपों को सरकार की जवाबदेही से जोड़ रही है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे केंद्र सरकार की राजनीतिक कार्रवाई बता रही है।
कांग्रेस नेता परगट सिंह ने विशेष रूप से आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी राजनीतिक अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सत्ता में आने से पहले लोकपाल और स्वच्छ प्रशासन के वादे किए थे। ऐसे में वर्तमान घटनाक्रम को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाना स्वाभाविक है।लोकपाल और लोकायुक्त जैसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की जांच के लिए संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध कराना है। आम आदमी पार्टी ने अपने राजनीतिक अभियानों में भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र को मजबूत करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।परगट सिंह ने इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री कार्यालय पर हुई छापेमारी को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके बयान का मुख्य आधार यह है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का वादा करने वाली सरकार को अब अपने कार्यालय से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ जांच का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, भगवंत मान सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर भाजपा की आलोचना की और कहा कि उनकी सरकार किसी भी कानूनी जांच का सामना करने के लिए तैयार है।इस मामले में केंद्र और राज्य के बीच कानूनी विवाद भी सामने आया है। पंजाब सरकार ने सीबीआई जांच से संबंधित हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। इससे स्पष्ट है कि मामला केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का भी हिस्सा है।छापेमारी के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका को लेकर जांच जारी है। सीबीआई को यह पता लगाना है कि कथित भ्रष्टाचार, प्रभाव के दुरुपयोग और सरकारी निर्णयों को प्रभावित करने से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल कांग्रेस नेता परगट सिंह के बयान ने पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी को आम आदमी पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी वादों से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोपों को खारिज करते हुए जांच के पीछे राजनीतिक उद्देश्य होने का दावा किया है।आने वाले समय में सीबीआई की जांच रिपोर्ट और अदालत की कार्यवाही से इस मामले की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय पर हुई छापेमारी, विपक्ष की आलोचना और राज्य सरकार के जवाब के कारण पंजाब में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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