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चंडीगढ़ निगम चुनाव में बदलेगा सियासी गणित आधे से ज्यादा पार्षदों को झटका

nidhi
5 Sept 2026 7:46 AM IST
चंडीगढ़ निगम चुनाव में बदलेगा सियासी गणित आधे से ज्यादा पार्षदों को झटका
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निगम चुनाव से पहले आरक्षण का दांव
चंडीगढ़: दिसंबर में प्रस्तावित चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने वाले हैं। नगर निगम के 35 वार्डों में आरक्षण तय करने के लिए 11 सितंबर को ड्रॉ निकाला जाएगा। यूटी राज्य चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जाति महिला और सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण निर्धारित होने के बाद कई मौजूदा पार्षदों को अपना वार्ड छोड़कर दूसरी सीट तलाशनी पड़ सकती है।
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार ड्रॉ की प्रक्रिया 11 सितंबर को दोपहर तीन बजे सेक्टर-6 स्थित यूटी स्टेट गेस्ट हाउस के कॉन्फ्रेंस हॉल में होगी। इसमें राजनीतिक दलों को भी आमंत्रित किया गया है। सीमित बैठने की व्यवस्था के कारण प्रत्येक राजनीतिक दल से अधिकतम पांच प्रतिनिधि शामिल हो सकेंगे।
35 में से 12 वार्ड महिलाओं के लिए
चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 निर्वाचित पार्षदों की सीटें हैं। प्रशासन की व्यवस्था के मुताबिक सात वार्ड अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए जाने हैं। कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे, जिनमें तीन अनुसूचित जाति महिला और नौ सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए होंगे। आधिकारिक रिकॉर्ड भी 35 निर्वाचित पार्षदों और सात एससी सीटों की संख्या की पुष्टि करता है। महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों का फैसला सार्वजनिक ड्रॉ से होगा। वर्ष 2021 के चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षित रहे वार्डों को इस बार ड्रॉ से बाहर रखा जाएगा। इसी तरह सात एससी वार्डों में से तीन एससी महिलाओं के लिए सार्वजनिक ड्रॉ के माध्यम से चुने जाएंगे।
सात नए वार्डों पर नजर
आरक्षण में रोटेशन व्यवस्था लागू होने के कारण पिछली बार एससी के लिए आरक्षित वार्ड इस बार उसी श्रेणी में नहीं होंगे। वर्ष 2021 में वार्ड नंबर 7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 एससी के लिए आरक्षित थे। इस बार 2011 की जनगणना में वार्डवार एससी आबादी के प्रतिशत के आधार पर अगले पात्र वार्ड चुने जाएंगे। मौजूदा गणना के आधार पर वार्ड नंबर 1, 3, 4, 9, 15, 29 और 32 संभावित एससी वार्डों के रूप में देखे जा रहे हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर 11 सितंबर की प्रक्रिया के बाद ही साफ होगी। इसलिए इन वार्ड नंबरों को अभी अंतिम आरक्षण नहीं माना जा सकता।
कई मौजूदा पार्षदों की बढ़ेगी मुश्किल
आरक्षण बदलने का सीधा असर मौजूदा पार्षदों और आगामी चुनाव की तैयारी कर रहे दावेदारों पर पड़ेगा। किसी सामान्य वार्ड के एससी या महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो जाने पर वर्तमान पार्षद को दूसरी सीट से टिकट मांगना पड़ सकता है। इसी वजह से भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित अन्य दलों के नेताओं की नजर 11 सितंबर के ड्रॉ पर लगी हुई है। संभावित एससी वार्डों की सूची में कई मौजूदा पार्षदों की सीटें शामिल हैं। वार्ड-3 से भाजपा पार्षद दलीप शर्मा, वार्ड-4 से भाजपा की सुमन शर्मा, वार्ड-9 से बिमला दुबे, वार्ड-15 से आप के रामचंद्र यादव और वार्ड-32 से भाजपा के जसमनप्रीत सिंह जैसे नेताओं के चुनावी समीकरण आरक्षण की अंतिम स्थिति के अनुसार बदल सकते हैं। महिला आरक्षण का भी व्यापक असर पड़ेगा। कुल 12 सीटें महिलाओं के लिए निर्धारित होने से कई पुरुष पार्षदों और टिकट दावेदारों को नया वार्ड तलाशना पड़ सकता है। कुछ नेता अपने परिवार की महिला सदस्य को चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति भी अपना सकते हैं।
राजनीतिक दलों को भेजा गया निमंत्रण
राज्य चुनाव आयोग ने भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, माकपा और नेशनल पीपुल्स पार्टी को ड्रॉ की प्रक्रिया में उपस्थित रहने के लिए कहा है। इससे आरक्षण प्रक्रिया राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी होगी। नगर निगम चुनाव दिसंबर 2026 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में वार्ड आरक्षण की अंतिम तस्वीर सामने आते ही टिकट के दावेदारों और राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जो नेता अभी अपने मौजूदा वार्ड में प्रचार और जनसंपर्क कर रहे हैं, उन्हें आरक्षण बदलने की स्थिति में नए क्षेत्र में राजनीतिक जमीन तलाशनी पड़ सकती है। 11 सितंबर का ड्रॉ इसलिए केवल आरक्षण की प्रक्रिया नहीं बल्कि कई मौजूदा पार्षदों के राजनीतिक भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। अंतिम सूची सामने आने के बाद ही साफ होगा कि कौन अपनी पुरानी सीट से चुनाव लड़ पाएगा और किसे दूसरे वार्ड का रुख करना पड़ेगा।
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