
जालंधर। पंजाब के जालंधर रेलवे स्टेशन पर दो दिन की नवजात बच्ची को गोद में लेकर कथित रूप से शराब के नशे में घूम रहे एक व्यक्ति को राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने हिरासत में लिया। पुलिस को फोन पर सूचना मिली थी कि स्टेशन परिसर में एक व्यक्ति नवजात बच्ची को बेचने के इरादे से घूम रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और व्यक्ति को हिरासत में लेकर बच्ची को अपने संरक्षण में लिया। हालांकि बाद में हुई पूछताछ में बच्ची को बेचने की बात सही नहीं पाई गई और नवजात उसी व्यक्ति की बेटी निकली।
जानकारी के मुताबिक, जालंधर रेलवे स्टेशन पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पुलिस को फोन कर सूचना दी थी कि एक शख्स नवजात बच्ची को गोद में लेकर संदिग्ध तरीके से घूम रहा है। सूचना देने वाले ने बच्ची को बेचने की आशंका जताई थी। नवजात से जुड़ा मामला होने के कारण राजकीय रेलवे पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की और टीम को स्टेशन परिसर में भेजा।
पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति को खोज लिया। उसके पास बेहद कम उम्र की बच्ची थी। बच्ची की उम्र महज दो दिन बताई गई है। व्यक्ति कथित रूप से शराब के नशे में था, इसलिए पुलिस ने सबसे पहले नवजात की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और उसे अपने संरक्षण में लेकर उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच कराई।
पुलिस ने व्यक्ति को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू की। शुरुआती जांच में उसने अपना नाम मनोज कुमार बताया। उसने पुलिस को जानकारी दी कि वह मूल रूप से मुगलसराय, बनारस का रहने वाला है और वर्तमान में पंजाब के फगवाड़ा स्थित जगतपुर जट्टा क्षेत्र में रह रहा था।
मनोज से बच्ची के संबंध में पूछताछ की गई तो उसने दावा किया कि नवजात उसकी अपनी बेटी है। पुलिस ने इस दावे की जांच की। प्राथमिक जांच में बच्ची को बेचने के लिए रेलवे स्टेशन लाए जाने की सूचना की पुष्टि नहीं हुई। पूछताछ और उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामने आया कि बच्ची मनोज की ही बेटी है।
मनोज ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है। ऐसे में नवजात की देखभाल की स्थिति को लेकर पुलिस की चिंता बढ़ गई। बच्ची की उम्र केवल दो दिन होने और उसकी नाजुक हालत को देखते हुए पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया।
राजकीय रेलवे पुलिस की ओर से बच्ची को जालंधर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसके स्वास्थ्य की जांच की गई। नवजात होने के कारण डॉक्टरों द्वारा उसकी स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है। पुलिस की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना रही कि बच्ची को सुरक्षित माहौल और जरूरी चिकित्सा देखभाल मिल सके।
इस मामले में शुरुआत में मानव तस्करी या नवजात को बेचने जैसी गंभीर आशंका जताई गई थी। इसी वजह से पुलिस ने सूचना मिलते ही कार्रवाई की। हालांकि पूछताछ आगे बढ़ने के बाद शुरुआती आशंका सही नहीं पाई गई। पुलिस ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में बच्ची को बेचने की बात सामने नहीं आई है।
इसके बावजूद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस संबंधित व्यक्ति के दावों और पारिवारिक परिस्थितियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। बच्ची की मां की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और नवजात की देखभाल की व्यवस्था के संबंध में भी आवश्यक जानकारी जुटाई जा सकती है।
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थान पर दो दिन की बच्ची को लेकर कथित रूप से नशे की हालत में घूमने का मामला सामने आने से वहां मौजूद यात्रियों में भी चिंता पैदा हुई। किसी यात्री ने संदिग्ध परिस्थितियां देखकर पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई संभव हो सकी।
पुलिस द्वारा समय रहते बच्ची को अपने संरक्षण में लेकर अस्पताल पहुंचाए जाने से उसकी स्वास्थ्य जांच और देखभाल सुनिश्चित की गई। नवजात शिशुओं को जन्म के शुरुआती दिनों में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे में पुलिस ने उसकी उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए अस्पताल में भर्ती कराना उचित समझा।
अब पुलिस यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में है कि बच्ची की आगे की देखभाल सुरक्षित तरीके से हो। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बाल कल्याण अधिकारियों और अन्य विभागों की मदद भी ली जा सकती है। नवजात को उसके पिता को कब और किन परिस्थितियों में सौंपा जाएगा, यह उसकी स्वास्थ्य स्थिति और जांच के आधार पर तय किया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस की जांच में बच्ची को बेचने की सूचना सही साबित नहीं हुई है। बच्ची मनोज कुमार की बेटी बताई गई है। मामले में पुलिस आगे की आवश्यक जांच कर रही है और नवजात को सिविल अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
रेलवे स्टेशन पर मिली एक सूचना से शुरू हुआ यह मामला पहले नवजात को बेचने की आशंका से जुड़ा दिखाई दिया, लेकिन जांच के बाद तस्वीर अलग सामने आई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण दो दिन की बच्ची को सुरक्षित संरक्षण और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।





