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27 अगस्त को पंजाब में एक दिन बंद रहेंगी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी

Kavita2
25 Aug 2026 3:58 PM IST
27 अगस्त को पंजाब में एक दिन बंद रहेंगी सरकारी अस्पतालों की ओपीडी
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बठिंडा। पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर प्रस्तावित आंदोलन का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विस यूनियन (पीएसएमएसयू) और सांझा मुलाजिम मंच की ओर से 27 अगस्त को दिए गए संघर्ष के आह्वान का समर्थन करते हुए पीसीएमएस एसोसिएशन ने भी एक दिन के लिए ओपीडी सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। एसोसिएशन के इस निर्णय से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पीसीएमएस एसोसिएशन बठिंडा के अध्यक्ष डॉ. जरूप सिंह ने इस संबंध में डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, पंजाब को पत्र भेजकर एसोसिएशन के फैसले की जानकारी दी है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर चलाए जा रहे संघर्ष के साथ खड़ी है।

कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में फैसला

एसोसिएशन के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों की कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर पीएसएमएसयू और सांझा मुलाजिम मंच ने 27 अगस्त को संघर्ष का आह्वान किया है। पीसीएमएस एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर सरकार को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए और लंबित मुद्दों का समाधान करना चाहिए।

एसोसिएशन ने जिन प्रमुख मांगों का समर्थन किया है, उनमें पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को लागू करना, महंगाई भत्ते (डीए) की लंबित किस्तों और बकाया का भुगतान करना, सातवें वेतन आयोग से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना और कर्मचारियों की भर्ती से संबंधित मुद्दों का समाधान करना शामिल है।

इसके अलावा संगठन ने कांट्रैक्ट, एडहॉक और आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था को समाप्त करने की मांग का भी समर्थन किया है।

ओपीएस बहाली प्रमुख मुद्दा

सरकारी कर्मचारियों के आंदोलन में पुरानी पेंशन योजना की बहाली प्रमुख मुद्दों में शामिल है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था महत्वपूर्ण है।

पीसीएमएस एसोसिएशन ने भी इस मांग को कर्मचारियों के हित से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है। संगठन का कहना है कि सरकार को कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर विचार कर उचित निर्णय लेना चाहिए।

डीए की किस्त और बकाया भुगतान की मांग

कर्मचारी संगठनों की दूसरी प्रमुख मांग महंगाई भत्ते की किस्तों और बकाया राशि के भुगतान से संबंधित है। बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारी लंबे समय से डीए की लंबित राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं।

एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा होना जरूरी है। लंबित भुगतान से कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है और उनके मनोबल पर भी असर पड़ता है।

वेतन आयोग की विसंगतियां दूर करने की मांग

सातवें वेतन आयोग से जुड़ी विसंगतियों का मुद्दा भी कर्मचारी संगठनों के एजेंडे में शामिल है। पीसीएमएस एसोसिएशन का कहना है कि वेतन निर्धारण में सामने आई विसंगतियों को दूर किया जाना चाहिए, ताकि अलग-अलग वर्गों के कर्मचारियों को उनके पद और जिम्मेदारियों के अनुरूप उचित वेतन लाभ मिल सके।

एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि वेतन आयोग से संबंधित लंबित मामलों की समीक्षा कर जल्द समाधान निकाला जाए।

आउटसोर्सिंग के खिलाफ भी आवाज

कर्मचारी संगठन सरकारी विभागों में कांट्रैक्ट, एडहॉक और आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं। उनकी मांग है कि नियमित प्रकृति के पदों पर स्थायी भर्ती की जाए और लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखा जाए।

पीसीएमएस एसोसिएशन ने इस मांग का भी समर्थन किया है। संगठन का मानना है कि सरकारी सेवाओं में स्थायी कर्मचारियों की संख्या बढ़ने से कर्मचारियों को बेहतर सेवा शर्तें और नौकरी की सुरक्षा मिल सकेगी।

मरीजों को हो सकती है परेशानी

27 अगस्त को ओपीडी सेवाएं बंद रहने के फैसले का सीधा असर सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों पर पड़ सकता है। रोजाना बड़ी संख्या में मरीज सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में इलाज और परामर्श के लिए पहुंचते हैं।

ओपीडी बंद रहने की स्थिति में सामान्य इलाज, चिकित्सकीय परामर्श और नियमित जांच के लिए आने वाले मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ सकती है। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर क्या व्यवस्था रहेगी, यह संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों के निर्देशों पर निर्भर करेगा।

सरकार से समाधान की उम्मीद

पीसीएमएस एसोसिएशन ने अपने फैसले के जरिए कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम कर्मचारियों की लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अब निगाहें पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर हैं। यदि सरकार कर्मचारी संगठनों के साथ बातचीत कर मांगों के समाधान की दिशा में पहल करती है तो आंदोलन को टाला या सीमित किया जा सकता है। वहीं, मांगों पर ठोस प्रगति नहीं होने की स्थिति में कर्मचारी संगठनों के आंदोलन को आगे बढ़ाने की संभावना बनी रह सकती है।

27 अगस्त को पीसीएमएस एसोसिएशन द्वारा ओपीडी सेवाएं बंद रखने का फैसला सरकारी कर्मचारियों की मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े चिकित्सकों के समर्थन को दर्शाता है। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन के बीच कर्मचारियों की मांगों पर क्या कदम उठाती है।

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