पंजाब

MP Seechewal ने पंजाब के 6.59% वन क्षेत्र पर जताई चिंता

Payal
6 April 2026 2:11 PM IST
MP Seechewal ने पंजाब के 6.59% वन क्षेत्र पर जताई चिंता
x
Punjab.पंजाब: Punjab में वन क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर सबसे कम होने की जानकारी सामने आई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार पंजाब का वन क्षेत्र केवल 6.59% है, जो पर्यावरण और जैव विविधता के लिए चिंता का विषय है। इस स्थिति पर M.P. Sechewal ने गहरी चिंता जताई है और राज्य सरकार से तत्काल कदम उठाने की अपील की है।
MP सीचेवाल ने कहा कि वन क्षेत्र का कम होना न केवल पर्यावरण संतुलन को प्रभावित करता है, बल्कि मिट्टी कटाव, बाढ़, गर्मी और प्रदूषण जैसी समस्याओं को भी बढ़ाता है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के बढ़ते दबाव के कारण वन क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है।
वन क्षेत्र कम होने से जैव विविधता पर भी गंभीर असर पड़ता है। पंजाब के जंगलों में कई प्रजातियों का आवास घट गया है, जिससे कई वन्य जीव संकट में हैं। MP सीचेवाल ने यह भी कहा कि बच्चों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा और पानी सुनिश्चित करने के लिए अब समय रहते संरक्षण के उपाय करना जरूरी है।
उन्होंने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मिलकर वृक्षारोपण अभियान चलाए जाएं। इसके साथ ही, अवैध कटाई पर कड़ी निगरानी और रोकथाम की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षण में शामिल करना और उन्हें जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल 6.59% वन क्षेत्र के साथ पंजाब देश में सबसे कम ग्रीन कवर वाला राज्य बन गया है। यह स्थिति जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बढ़ा सकती है और लोगों के जीवन स्तर पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
MP सीचेवाल ने आगे कहा कि राज्य में ‘ग्रीन कॉरिडोर’ और ‘वन सुधार परियोजनाओं’ की योजना बनाकर वन क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देकर युवाओं में संरक्षण की भावना विकसित की जा सकती है।
सरकार ने अभी तक इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वन संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए विशेष पहल की जाएगी। इसके अंतर्गत नई नीतियों और वित्तीय सहायता के माध्यम से वन क्षेत्र में वृद्धि की जाएगी।
कुल मिलाकर, पंजाब का केवल 6.59% वन क्षेत्र पर्यावरणीय संकट की तरफ संकेत करता है। MP सीचेवाल की चिंता इस बात को उजागर करती है कि यदि तत्काल सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में राज्य में जलवायु, जैव विविधता और लोगों की जीवन गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। वन संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास और सख्त नीतियां ही इस समस्या का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती हैं।
Next Story