पंजाब
Jalandhar में मातृ स्वास्थ्य में सुधार, लेकिन प्रसव के बाद सावधानी जरूरी
Ratna Netam
7 May 2026 12:58 PM IST

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Jalandhar.जालंधर: जालंधर में मातृ स्वास्थ्य से जुड़े हालिया आंकड़ों के अनुसार मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन प्रसव के बाद महिलाओं में जोखिम अभी भी गंभीर रूप से बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में यह जानकारी साझा की गई है कि उचित स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता कार्यक्रमों के कारण माताओं की सुरक्षा बेहतर हुई है, लेकिन डिलीवरी के बाद निगरानी और देखभाल में कमी से कई मामले अभी भी चिंता का कारण बने हुए हैं।
जालंधर के जिलाधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में मातृ मृत्यु दर में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं का सुधार, प्रसव के दौरान प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना शामिल है।
हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव के बाद महिला माताओं में ब्लीडिंग, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा अभी भी बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल से डिस्चार्ज के बाद माताओं की नियमित निगरानी, पोषण और रोग नियंत्रण के उपायों में सुधार की आवश्यकता है।
जालंधर के सरकारी अस्पतालों और मातृ-शिशु स्वास्थ्य केंद्रों ने माताओं के लिए पोस्ट-डिलीवरी चेकअप और हेल्थ मॉनिटरिंग कार्यक्रम शुरू किए हैं। लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं तक यह सुविधाएं पूरी तरह से नहीं पहुंच पाई हैं। इस वजह से माताओं के स्वास्थ्य पर जोखिम बना हुआ है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि प्रसव के बाद माताओं के लिए विशेष पोषण और शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार और समुदाय का सहयोग भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पोस्ट-डिलीवरी जटिलताओं की पहचान और समय पर इलाज जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा, “हमारे प्रयासों से मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी हमें पोस्ट-डिलीवरी देखभाल पर अधिक जोर देने की आवश्यकता है। महिला स्वास्थ्य के लिए शिक्षा, जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हैं।”
स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता और NGOs भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने महिलाओं और उनके परिवारों को पोषण, संक्रमण से बचाव और प्रसव के बाद संकेतों की पहचान के बारे में शिक्षित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए हैं।
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