पंजाब

मानसा जेल में नशे का बड़ा खुलासा 69 प्रतिशत कैदी पाए गए नशे के आदी

nidhi
25 Aug 2026 6:40 AM IST
मानसा जेल में नशे का बड़ा खुलासा 69 प्रतिशत कैदी पाए गए नशे के आदी
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नशे के खिलाफ उठाए कदम

चंडीगढ़: पंजाब की जेलों में नशे की समस्या को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत के सामने पेश आंकड़ों में सामने आया है कि मानसा जेल में करीब 69 प्रतिशत कैदी नशे की चपेट में हैं। इस खुलासे के बाद हाईकोर्ट ने राज्य की सभी जेलों की स्थिति की विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सरकार और जेल प्रशासन से कैदियों में नशे की लत, इलाज की व्यवस्था और रोकथाम के उपायों को लेकर पूरी रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि जेलों के अंदर नशे की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जेल सुधार गृह होते हैं, जहां कैदियों को अपराध से दूर कर बेहतर जीवन की ओर ले जाने का प्रयास किया जाना चाहिए। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में कैदी नशे की गिरफ्त में हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
मानसा जेल के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
सुनवाई के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार मानसा जेल में बड़ी संख्या में कैदी नशे की समस्या से जूझ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि यहां करीब 69 प्रतिशत कैदी नशे से प्रभावित हैं। इस स्थिति ने जेलों में नशामुक्ति कार्यक्रमों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि जेलों में बंद कैदियों को नशे से बाहर निकालने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। केवल नशे की रोकथाम ही नहीं, बल्कि प्रभावित कैदियों के इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
सभी जेलों का मांगा गया ब्योरा
मानसा जेल के आंकड़े सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने पंजाब की सभी जेलों से संबंधित जानकारी मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि प्रत्येक जेल में कितने कैदी नशे की समस्या से प्रभावित हैं, कितने कैदियों का इलाज चल रहा है और नशामुक्ति के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने जेल प्रशासन से यह भी जानकारी मांगी है कि जेलों में नशीले पदार्थों की सप्लाई रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं। इसके अलावा जेल कर्मचारियों की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
जेलों में नशा पहुंचना बड़ी चुनौती
पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है। राज्य में नशे की तस्करी और युवाओं में बढ़ती लत को लेकर कई बार चिंता जताई जा चुकी है। अब जेलों के भीतर भी नशे की पहुंच सामने आने के बाद प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। जेलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद नशीले पदार्थों का पहुंचना कई सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जेलों में नशे की रोकथाम के लिए सख्त जांच, आधुनिक तकनीक और बेहतर निगरानी व्यवस्था जरूरी है।
कैदियों के पुनर्वास पर जोर
हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि जेलों में केवल सजा काटना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि कैदियों को समाज में वापस लौटने के लिए तैयार करना भी जरूरी है। इसके लिए नशामुक्ति केंद्रों, काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। नशे की गिरफ्त में आए कैदियों को इलाज और सही मार्गदर्शन मिलने से उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जेल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा।
सरकार को उठाने होंगे ठोस कदम
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब पंजाब सरकार और जेल विभाग को सभी जेलों की स्थिति का विस्तृत आकलन करना होगा। रिपोर्ट के आधार पर नशे की समस्या से निपटने के लिए नई रणनीति बनाई जा सकती है। अदालत की सख्ती के बाद उम्मीद है कि जेलों में नशे की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और प्रभावित कैदियों के इलाज व पुनर्वास पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।
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