पंजाब

झोटा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, मेडिकल स्टोर पर 4 साल में 10 बार छापा

Kiran
15 Oct 2026 10:35 AM IST
झोटा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, मेडिकल स्टोर पर 4 साल में 10 बार छापा
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Chandigarh मानसा में केमिस्ट अश्वनी कुमार द्वारा नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद, पंजाब में फल-फूल रहे फार्मास्युटिकल माफिया पर एक बार फिर सबकी नज़रें टिक गई हैं। इस मामले में रेगुलेटरी कमियों, राजनीतिक संरक्षण और नशा पैदा करने वाली दवाओं की बेरोकटोक अवैध बिक्री के आरोप लग रहे हैं।
मानसा के ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार के अनुसार, अश्वनी पर 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' के तहत एक मामला चल रहा था, जिसमें उसे हाल ही में बरी कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि पिछले चार सालों में इस केमिस्ट की दुकान पर लगभग 10 बार छापेमारी की गई थी और तीन बार उसका लाइसेंस सस्पेंड भी किया गया था। पुलिस सूत्रों ने बताया, "लेकिन उसका लाइसेंस रद्द नहीं किया गया।" उन्होंने यह भी कहा कि उसकी दुकान से तीन बार नशीले पदार्थ बरामद किए गए थे।
पंजाब केमिस्ट्स एसोसिएशन (PCA) के महासचिव जीएस चावला ने कहा कि ऐसे लोग पूरे फार्मास्युटिकल कारोबार को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "इस व्यक्ति को 2023 में प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाओं की अवैध बिक्री के आरोप में पकड़ा गया था और जेल भेजा गया था। फिर भी उसका लाइसेंस रद्द क्यों नहीं हुआ? उसे हथियारों का लाइसेंस कैसे मिल गया, और वह अपना अवैध ड्रग कारोबार कैसे जारी रख सका? ये ऐसे सवाल हैं जिनकी जांच होनी चाहिए।" डॉ. चावला ने कहा कि सरकार को पता है कि हर शहर में ऐसे दो-तीन 'काली भेड़ें' (गलत काम करने वाले लोग) मौजूद हैं, लेकिन सरकार उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रही है।
उन्होंने कहा, "हमने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। हमने राज्य भर के केमिस्टों के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की है, जिसमें उनसे कहा गया है कि वे दवाओं का सही रिकॉर्ड रखें और यह सुनिश्चित करें कि दवाएं केवल डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन पर ही बेची जाएं।" प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह ने आरोप लगाया कि ऐसे कई निर्माताओं, डीलरों और स्वास्थ्य संस्थानों को अलग-अलग सरकारों का संरक्षण मिला हुआ है, जिसकी वजह से बिना किसी जवाबदेही के अवैध गतिविधियां जारी रहती हैं।
"यह एक ऐसा मजबूत नेटवर्क है, जिसमें स्थानीय पुलिस, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से लेकर मंत्री तक, हर कोई अपना हिस्सा (कट) लेता है।" निरंजन सिंह ने कहा, "हम अपने राज्य में नशीले पदार्थों की तस्करी को तो रोक सकते हैं, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से दवाओं की अवैध चोरी, उनकी बिक्री और सेवन को रोकने के लिए बहुत कम काम हुआ है।" बार-बार फोन करने और मैसेज भेजने के बावजूद, ड्रग्स विभाग के संयुक्त आयुक्त संजीव कुमार ने ऐसे लोगों के खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई की कोई रिपोर्ट साझा नहीं की। वहीं, जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी अमन वर्मा ने कहा कि उनके पास अश्वनी कुमार के खिलाफ दर्ज मामलों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
NCB की रिपोर्ट क्या कहती है?
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में राज्य में कोडीन-युक्त कफ सिरप की 8,95,508 बोतलें जब्त की गईं। यह देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है। पंजाब में हेरोइन की जब्ती के आंकड़े भी उतने ही चिंताजनक हैं। 2025 में राज्य में 2,086 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जो देश भर में जब्त की गई कुल 3,269 किलोग्राम हेरोइन का 58 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया है, "नियमों का पालन न करने वाली फार्मेसियों के जरिए ब्यूप्रेनॉर्फिन, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसी सस्ती और कानूनी रूप से बनी दवाएं आसानी से उपलब्ध हैं। इस वजह से, इन दवाओं का गलत इस्तेमाल नशे के एक विकल्प के रूप में किया जा रहा है।"
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