पंजाब

खैरा ने सरकारी आवासों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया

Ratna Netam
30 Sept 2026 8:39 PM IST
खैरा ने सरकारी आवासों के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाया
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चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी आवासों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने बुधवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा पंजाब सरकार के मंत्रियों के लिए आवंटित सरकारी बंगलों के कथित अनधिकृत इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। गुलाब चंद कटारिया पंजाब के राज्यपाल होने के साथ केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं।
खैरा ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि चंडीगढ़ में पंजाब के मंत्रियों के लिए निर्धारित कुछ सरकारी आवास ऐसे AAP नेताओं और पदाधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिनके पास इन मकानों पर आधिकारिक अधिकार नहीं है। उन्होंने इस मामले में आवासों के वास्तविक आवंटन, उनमें रह रहे लोगों और सरकारी नियमों के पालन की जांच कराने की मांग की है।
कांग्रेस विधायक ने विशेष रूप से चंडीगढ़ के सेक्टर-39 स्थित हाउस नंबर 960 और 961 का जिक्र किया। खैरा का दावा है कि हाउस नंबर 960 पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह को आवंटित किया गया था, लेकिन इसका इस्तेमाल AAP नेता और पंजाब मामलों के प्रभारी मनीष सिसोदिया कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह सरकारी आवास मंत्री के नाम पर आवंटित है तो किसी दूसरे राजनीतिक पदाधिकारी को वहां रहने की अनुमति किस आधार पर दी गई। यह फिलहाल खैरा का आरोप है और इसकी किसी सरकारी जांच से पुष्टि नहीं हुई है।
इसी तरह खैरा ने हाउस नंबर 961 को लेकर भी सवाल उठाए। यह आवास पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह को आवंटित बताया गया है। खैरा ने आरोप लगाया कि AAP की पंजाब ऑब्जर्वर गायत्री बिश्नोई इस सरकारी आवास का इस्तेमाल कर रही थीं। उन्होंने राज्यपाल से यह पता लगाने की मांग की कि क्या किसी मंत्री के आधिकारिक आवास में पार्टी पदाधिकारी का रहना सरकारी आवास नियमों के तहत अनुमति प्राप्त है।
हालांकि गायत्री बिश्नोई ने खैरा के आरोपों का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के आधिकारिक आवास में उनकी अनुमति से रह रही थीं क्योंकि उनके पिता का इलाज चल रहा था। बिश्नोई ने खैरा के कुछ आरोपों को निराधार बताते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
इस विवाद के बीच बिश्नोई ने बाद में चंडीगढ़ का संबंधित सरकारी बंगला खाली कर दिया। इस कदम के बाद भी विपक्षी दल सरकारी आवासों के इस्तेमाल की पूरी जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा बाद में मकान खाली कर देना इस सवाल का जवाब नहीं है कि उसे वहां रहने की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत दी गई थी।
खैरा ने अपने पत्र में मांग की है कि चंडीगढ़ प्रशासन यह स्पष्ट करे कि संबंधित सरकारी मकानों का आधिकारिक आवंटी कौन है, वर्तमान और पिछले समय में उनका वास्तविक इस्तेमाल किसने किया और क्या इसके लिए किसी विभाग से अनुमति ली गई थी। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
यह मुद्दा पिछले कुछ दिनों से पंजाब की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस के अलावा भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने भी AAP के कुछ पदाधिकारियों द्वारा सरकारी आवासों के कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। भाजपा की ओर से भी आरोप लगाया गया कि पंजाब सरकार के मंत्रियों के लिए तय आवासों का इस्तेमाल दिल्ली से जुड़े AAP नेता कर रहे हैं। ये विपक्षी दलों के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
सरकारी आवास आमतौर पर पद और पात्रता के आधार पर आवंटित किए जाते हैं। ऐसे में विवाद का प्रमुख सवाल यह है कि क्या आवंटित मंत्री के अलावा किसी राजनीतिक पदाधिकारी को लंबे समय तक ऐसे आवास में रहने की अनुमति दी जा सकती है और यदि दी गई तो उसके लिए क्या औपचारिक प्रक्रिया अपनाई गई।
खैरा ने आरोप लगाया कि यह केवल दो बंगलों का मामला नहीं है और पंजाब के अन्य सरकारी आवासों के इस्तेमाल की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासन से रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने की मांग की कि कहीं दूसरे सरकारी मकानों का भी गैर-अधिकृत तरीके से इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा।
AAP की ओर से गायत्री बिश्नोई ने अपने मामले में स्पष्ट किया है कि उनके रहने की व्यवस्था संबंधित मंत्री की अनुमति से थी। वहीं मनीष सिसोदिया के हाउस नंबर 960 में रहने को लेकर खैरा के आरोप पर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में किसी आधिकारिक जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए इस दावे को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सरकारी आवास का यह विवाद राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विपक्ष इसे सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग और पंजाब सरकार पर दिल्ली के AAP नेतृत्व के प्रभाव से जोड़ रहा है, जबकि संबंधित AAP नेता आरोपों को राजनीतिक और आधारहीन बता रहे हैं।
अब नजर पंजाब राजभवन और चंडीगढ़ प्रशासन की प्रतिक्रिया पर रहेगी। यदि जांच के आदेश दिए जाते हैं तो आवास आवंटन के दस्तावेज, रहने की अनुमति और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
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