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जालंधर दोमोरिया पुल में जलभराव, 50 लाख के वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट का काम रुका

nidhi
7 Aug 2026 9:26 AM IST
जालंधर दोमोरिया पुल में जलभराव, 50 लाख के वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट का काम रुका
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जालंधर के दोमोरिया पुल में बारिश के बाद पानी भर गया, जिससे 50 लाख रुपये के वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट का काम प्रभावित हुआ।

जालंधर : जालंधर में बारिश के बाद दोमोरिया पुल क्षेत्र में जलभराव की समस्या ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर पानी निकासी और जल संरक्षण के लिए करीब 50 लाख रुपये की लागत से वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है, वहीं काम पानी भरने के कारण प्रभावित हो गया है।

बारिश के बाद पुल के नीचे पानी जमा होने से निर्माण कार्य में बाधा आ रही है। इससे परियोजना के समय पर पूरा होने को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
बारिश के बाद बढ़ी परेशानी
दोमोरिया पुल इलाके में जलभराव स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पानी जमा होने से आवाजाही प्रभावित हुई और आसपास के क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे में वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट से राहत की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल काम रुकने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।
50 लाख रुपये की लागत से बन रहा प्रोजेक्ट
जल संरक्षण और जलभराव की समस्या को कम करने के उद्देश्य से दोमोरिया पुल के पास वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का लक्ष्य बारिश के पानी को एकत्र कर उसका बेहतर प्रबंधन करना है।
इससे भविष्य में—
बारिश के पानी का संचयन हो सकेगा।
जलभराव की समस्या कम हो सकती है।
भूजल स्तर सुधारने में मदद मिल सकती है।
शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को राहत मिल सकती है।
काम रुकने से उठे सवाल
बारिश के कारण प्रोजेक्ट का काम प्रभावित होने पर लोगों ने सवाल उठाए हैं कि यदि यह परियोजना जलभराव रोकने के लिए बनाई जा रही है तो निर्माण के दौरान पानी निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पानी निकालकर निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने की मांग की है।
प्रशासन के सामने चुनौती
नगर प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर मौजूदा जलभराव से लोगों को राहत देनी है, वहीं दूसरी ओर वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में बढ़ते जलभराव से निपटने के लिए केवल नई परियोजनाएं बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी योजना, निर्माण और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

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