पंजाब
Jalandhar: शिक्षकों ने उठाया शांति का स्वर, डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट ने युद्ध की निंदा की
Ratna Netam
7 May 2026 1:27 PM IST

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Jalandhar.जालंधर: डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) ने हाल ही में ईरान पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई और युद्ध की कड़ी निंदा की है। संगठन ने अपने बयान में कहा कि युद्ध से केवल निर्दोष नागरिकों की जान खतरे में पड़ती है और इससे शिक्षा, समाज और मानवता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
DTF के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, “शिक्षक समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए हम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी देश पर सैन्य कार्रवाई और युद्ध की नीति का समर्थन नहीं किया जा सकता। शांति और संवाद के जरिए ही किसी विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। हम ईरान और अन्य देशों में जारी सैन्य तनाव के खिलाफ आवाज उठाते हैं।”
संगठन ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह युद्ध को बढ़ावा देने वाले कदमों को रोकें और कूटनीतिक उपायों के जरिए विवादों का समाधान निकालें। DTF ने कहा कि शिक्षा और विकास पर युद्ध का बुरा असर पड़ता है, और इससे नई पीढ़ी की संभावनाओं और सुरक्षा को खतरा होता है।
DTF ने जोर दिया कि शिक्षक केवल शिक्षा देने वाले नहीं हैं, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाले नागरिक भी हैं। संगठन ने कहा कि युद्ध विरोधी आवाज उठाना और शांतिपूर्ण समाधान की मांग करना समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की निंदा न केवल शिक्षा जगत में नैतिक संदेश देती है, बल्कि युवा और समाज के अन्य वर्गों को भी शांति और संवाद की दिशा में सोचने पर मजबूर करती है। DTF का यह कदम दर्शाता है कि शिक्षक सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और वैश्विक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करने में सक्रिय हैं।
संगठन ने अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस और शांति शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया। DTF के अनुसार, शिक्षकों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे विद्यार्थियों को हिंसा के नकारात्मक प्रभावों और शांति के महत्व के बारे में जागरूक करें।
इस अवसर पर, संगठन ने भारत सरकार और वैश्विक समुदाय से आग्रह किया कि वे ईरान और किसी भी अन्य विवादित क्षेत्र में सैन्य कदमों को रोकें और विवादों का समाधान कूटनीति, वार्ता और समझौते के माध्यम से निकालें। DTF ने स्पष्ट किया कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि यह मानवीय संकट को और बढ़ाता है।
संगठन ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक समुदाय से भी अपील की कि वे शांति और संघर्ष समाधान की वकालत करें और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं। DTF का कहना है कि शिक्षा और शांति को बढ़ावा देना हर शिक्षक की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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