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Jalandhar: मॉडल टाऊन से सटे लतीफपुरा क्षेत्र में वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्ज़ों को लेकर अब बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल गए हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल एच.पी.एस. ईशर ने अदालत को आश्वस्त किया कि 9 फरवरी से पहले लतीफपुरा से कब्जे हटा दिए जाएंगे। यह मामला डिप्टी कमिश्नर जालंधर के खिलाफ दायर अदालत की अवमानना याचिका से जुड़ा है।
गौरतलब है कि 29 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने डी.सी. जालंधर को एक माह के भीतर लतीफपुरा की सड़कों से सभी अवैध क़ब्ज़े हटाकर यातायात बहाल करने के आदेश दिए थे। हालांकि कई महीने बीत जाने के बावजूद आदेशों पर अमल नहीं हुआ। इसके बाद याचिकाकर्त्ता सोहन सिंह और रबिंदर सिंह की ओर से उनके वकील एडवोकेट रणजीत सिंह बजाज और सिदकजीत सिंह बजाज ने पहले कानूनी नोटिस भेजा और फिर अवमानना याचिका दायर की। आज स्थिति यह है कि लतीफ़पुरा की 120 फुट चौड़ी मुख्य सड़क कब्जों के कारण पूरी तरह बंद पड़ी है। वर्ष 2022 में हुए तोड़फोड़ अभियान के बाद न तो मलबा हटाया गया और न ही सड़क का निर्माण किया गया। बाद में विस्थापित लोगों ने अस्थायी झोंपड़ियाँ बनाकर दोबारा रास्ता घेर लिया, जिससे स्कूली बसों, एंबुलेंसों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों की लगातार अनदेखी और अवमानना केस के दबाव के बाद जिला प्रशासन अब फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में व्यापक एक्शन ड्राइव की तैयारी कर रहा है। इस कार्रवाई की निगरानी जिला प्रशासन स्वयं करेगा और पहले चरण में ड्यूटी मैजिस्ट्रेट की नियुक्ति की जाएगी। नगर निगम जालंधर की ओर से डिच मशीनें, लोडर, टिप्पर सहित भारी मशीनरी उपलब्ध करवाई जाएगी, जबकि मलबा उठाने और साइट की सफाई की जिम्मेदारी निगम की टीमों को सौंपी जाएगी। चूंकि यह पूरा इलाका इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की स्कीम के अंतर्गत आता है, इसलिए ट्रस्ट के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहेंगे। सुरक्षा व्यवस्था की कमान कमिश्नरेट पुलिस के हाथ में होगी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूरे ऑपरेशन की निगरानी करेंगे।
उल्लेखनीय है कि 2022 की कार्रवाई के बाद विस्थापित परिवारों ने ‘लतीफपुरा पुनर्वास मोर्चा’ बनाकर सरकार के खिलाफ आंदोलन भी शुरू किया था। शुरुआती दौर में आम आदमी पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं ने मदद का भरोसा दिलाया, लेकिन समय के साथ मामला राजनीतिक रूप से ठंडा पड़ गया। न तो अवैध क़ब्ज़ों को हटाने में गंभीरता दिखाई दी और न ही पुनर्वास को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया। अब स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि अदालत में चल रहे अवमानना मामले के चलते प्रशासन इस बार ढिलाई नहीं बरतेगा और लतीफपुरा की बंद पड़ी सड़कों के खुलने का रास्ता साफ होगा। साथ ही यह देखना भी अहम होगा कि सरकार विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर क्या ठोस नीति अपनाती है।
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