"मुकाबला करना है तो CM से कराओ"...भगवंत मान के खिलाफ चुनाव लड़ने को तैयार राजा वडिंग

Punjab: पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व उन्हें चुनाव लड़ाने का फैसला करता है, तो वह मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वडिंग का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं तेज हैं।
फरीदकोट में कांग्रेस के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजा वडिंग ने पार्टी के एक नेता के उस सुझाव को खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने की सलाह दी गई थी। वडिंग ने कहा कि सुखबीर बादल अब राजनीतिक रूप से प्रभावी नहीं रहे हैं और उनसे मुकाबला करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, "सुखबीर बादल से मुझे चुनाव मत लड़ाओ, वह तो पहले ही ढेर हैं। अगर मुकाबला करवाना है तो भगवंत मान से करवाओ। उनसे मुझे चुनाव लड़वाओ।" राजा वडिंग ने कहा कि चुनाव लड़ने का अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान करता है और पार्टी नेतृत्व जिस सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाएगा, वह उसी निर्णय का पालन करेंगे। हालांकि उन्होंने दोहराया कि यदि मौका मिला तो वह मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ चुनाव लड़ना पसंद करेंगे। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा, "मैं लड़ूंगा और उन्हें पता चल जाएगा।"
गौरतलब है कि राजा वडिंग इससे पहले मुक्तसर जिले की गिद्दड़बाहा विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान वर्तमान में संगरूर जिले की धुरी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस नेतृत्व भविष्य में ऐसा निर्णय लेता है तो पंजाब की राजनीति में यह मुकाबला सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में से एक बन सकता है।
वडिंग का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पंजाब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में पार्टी के कुछ नेताओं का एक वर्ग राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के कांग्रेस हाईकमान के फैसले का विरोध कर रहा है। यह गुट नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी उठा चुका है।
दरअसल, कांग्रेस नेतृत्व ने 1 जुलाई को राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का फैसला किया था। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इसके बाद से संगठन के भीतर गुटबाजी की चर्चाएं लगातार तेज हो गई हैं।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार यह दावा कर रहा है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने और सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि आंतरिक मतभेदों को दूर कर चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है।
राजा वडिंग के ताजा बयान ने पंजाब की राजनीतिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस हाईकमान उम्मीदवारों के चयन में क्या रणनीति अपनाता है और क्या वास्तव में मुख्यमंत्री भगवंत मान और राजा वडिंग के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता है।





