पंजाब

सुखबीर बादल पर हमले को लेकर हरसिमरत का बड़ा आरोप NIA जांच की मांग

nidhi
17 Aug 2026 11:32 AM IST
सुखबीर बादल पर हमले को लेकर हरसिमरत का बड़ा आरोप NIA जांच की मांग
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फिर हत्या की कोशिश का आरोप हरसिमरत ने गृह मंत्री से मांगी NIA जांच
चंडीगढ़ : शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल से जुड़ी सुरक्षा घटना को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। बठिंडा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि सुखबीर बादल को एक बार फिर निशाना बनाने की कोशिश की गई है।
हरसिमरत कौर ने इस घटना को सुखबीर बादल की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि घटना के पीछे की पूरी साजिश और इसमें शामिल लोगों का पता लगाने के लिए स्वतंत्र तथा उच्चस्तरीय जांच जरूरी है।
मामले ने इसलिए भी ज्यादा तूल पकड़ा है क्योंकि सुखबीर सिंह बादल पर इससे पहले भी हमला हो चुका है। दिसंबर 2024 में अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार पर धार्मिक सेवा के दौरान उन पर गोली चलाने की कोशिश हुई थी। हमलावर की गोली उन्हें नहीं लगी और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया था। उस घटना के बाद सुखबीर बादल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। हरसिमरत कौर ने अब केंद्रीय गृह मंत्री से मांग की है कि ताजा मामले को केवल सामान्य सुरक्षा चूक के तौर पर न देखा जाए। उनके मुताबिक पिछली घटना और मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए यह पता लगाना जरूरी है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश या संगठित नेटवर्क सक्रिय है। उन्होंने अपने पत्र में पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी को मामला सौंपा जाना चाहिए।
अमित शाह से की हस्तक्षेप की मांग
हरसिमरत कौर बादल ने गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र तत्काल कदम उठाए। उन्होंने NIA जांच की मांग करते हुए कहा कि इसके जरिए घटना के पीछे मौजूद लोगों, उनके मकसद और संभावित नेटवर्क का पता लगाया जा सकता है।
हालांकि NIA जांच की मांग एक राजनीतिक और कानूनी मांग है। मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जाएगा या नहीं, इसका फैसला संबंधित कानूनी प्रक्रिया और केंद्र सरकार के स्तर पर होगा। हरसिमरत कौर की चिट्ठी के बाद अब केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। अगर गृह मंत्रालय मामले में रिपोर्ट मांगता है या किसी केंद्रीय एजेंसी को जांच की जिम्मेदारी देता है तो घटनाक्रम नया मोड़ ले सकता है।
पहले भी सुखबीर बादल पर चली थी गोली
सुखबीर बादल की सुरक्षा को लेकर सबसे गंभीर घटना 4 दिसंबर 2024 को सामने आई थी। वह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के बाहर धार्मिक सेवा कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उन पर गोली चलाने की कोशिश की थी। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों की तत्परता के कारण सुखबीर बादल को कोई चोट नहीं आई थी। आरोपी को पकड़ लिया गया था और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
इस घटना के बाद पंजाब में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। शिरोमणि अकाली दल ने भी इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए गहन जांच की मांग की थी। अब नई घटना के बाद हरसिमरत कौर ने पुराने हमले का संदर्भ देते हुए इसे दोबारा हत्या की कोशिश के रूप में पेश किया है। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही घटनाओं को अलग-अलग नहीं देखा जाना चाहिए।
पंजाब की राजनीति में बढ़ी हलचल
सुखबीर बादल पंजाब की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह पंजाब के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और लंबे समय से शिरोमणि अकाली दल के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी घटना का राजनीतिक असर व्यापक होना स्वाभाविक है।
अकाली दल के नेताओं ने इस मामले को लेकर पंजाब सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पार्टी की मांग है कि घटना की हर कड़ी की जांच की जाए और सुखबीर बादल की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। दूसरी ओर जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि ताजा घटना के पीछे वास्तविक मकसद क्या था। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए आरोपी या संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका, डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य तथा अन्य परिस्थितियों की जांच आवश्यक होगी।
क्यों मांगी NIA जांच?
NIA मुख्य रूप से आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनुसूचित अपराधों की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी है। किसी मामले में NIA की भूमिका संबंधित कानूनों और परिस्थितियों के आधार पर तय होती है।
हरसिमरत कौर की मांग का आधार यह है कि सुखबीर बादल जैसे प्रमुख राजनीतिक नेता को बार-बार निशाना बनाए जाने की घटनाओं के पीछे संभावित व्यापक साजिश की आशंका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि केवल स्थानीय स्तर पर जांच पर्याप्त नहीं होगी और केंद्रीय एजेंसी पूरे नेटवर्क का पता लगाने में सक्षम होगी। फिलहाल यह हरसिमरत कौर बादल की मांग है और NIA जांच शुरू होने की पुष्टि नहीं हुई है। केंद्र की ओर से इस मांग पर आगे क्या फैसला लिया जाता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
सुखबीर बादल की सुरक्षा पर सवाल
लगातार सुरक्षा संबंधी घटनाओं के बाद सुखबीर बादल की सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा के केंद्र में है। राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा खतरे के आकलन के आधार पर तय की जाती है और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जाती है। यदि किसी नेता के खिलाफ नया खतरा सामने आता है तो संबंधित सुरक्षा एजेंसियां उसके आधार पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर सकती हैं। ताजा घटनाक्रम के बाद भी सुरक्षा एजेंसियों की ओर से खतरे का आकलन किए जाने की संभावना है। हरसिमरत कौर का कहना है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल इस मामले में कई सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह पता लगाना होगा कि घटना व्यक्तिगत स्तर पर हुई या इसके पीछे किसी संगठन अथवा अन्य लोगों की भूमिका थी। यदि किसी बड़ी साजिश के संकेत मिलते हैं तो जांच का दायरा बढ़ सकता है। इसके लिए फोन रिकॉर्ड, डिजिटल कम्युनिकेशन, संदिग्धों के संपर्क और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो सकती है। किसी भी व्यक्ति या संगठन की भूमिका के बारे में जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
केंद्र की प्रतिक्रिया का इंतजार
हरसिमरत कौर बादल द्वारा अमित शाह को लिखी गई चिट्ठी के बाद अब सभी की नजर केंद्रीय गृह मंत्रालय पर है। अकाली दल चाहता है कि मामले की जांच NIA को सौंपी जाए ताकि किसी भी संभावित साजिश का पर्दाफाश हो सके। मामला पंजाब की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक सुरक्षा दोनों से जुड़ गया है। आने वाले दिनों में पंजाब सरकार, पुलिस और केंद्रीय गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया से यह साफ होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। हरसिमरत कौर ने अपनी मांग में यह स्पष्ट किया है कि सुखबीर बादल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और पूरे मामले की तह तक पहुंचना जरूरी है। फिलहाल NIA जांच की मांग ने इस घटनाक्रम को पंजाब से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक चर्चा में ला दिया है।
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