पंजाब

आतंकी मॉड्यूल केस के बाद हटाए गए गुरप्रीत भुल्लर, जानिए पूरा विवाद

Ratna Netam
7 Aug 2026 7:13 PM IST
आतंकी मॉड्यूल केस के बाद हटाए गए गुरप्रीत भुल्लर, जानिए पूरा विवाद
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चंडीगढ़ : पंजाब सरकार द्वारा अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर का अचानक तबादला किए जाने के बाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। सरकार ने गुरप्रीत सिंह भुल्लर की जगह डीआईजी बॉर्डर रेंज हरमन बीर सिंह गिल को अमृतसर पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब अमृतसर पुलिस ने हाल ही में पाकिस्तान समर्थित एक कथित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। इस कार्रवाई और उसके बाद दिए गए पुलिस कमिश्नर के बयान के कारण तबादले के समय को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। हालांकि सरकार की ओर से तबादले को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है और इसे किसी विवाद से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अमृतसर पुलिस ने 4 अगस्त को जानकारी दी थी कि उसने एक विशेष अभियान के दौरान पाकिस्तान समर्थित एक कथित आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल बताए गए। पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से तीन पिस्तौल, नौ जिंदा कारतूस और चार पेट्रोल बॉटल बम बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि गिरफ्तार आरोपी विदेश में बैठे आईएसआई हैंडलर्स के संपर्क में थे और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करने के साथ-साथ अन्य गतिविधियों की तैयारी कर रहे थे।
इस कार्रवाई के अगले दिन तत्कालीन पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि जांच में कुछ ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनके अनुसार आतंकी मॉड्यूल के कुछ सदस्य राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर भी गए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें वहां रेकी करने और पेट्रोल बम के जरिए हमला करने की योजना से जुड़े सुराग मिले हैं। इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और विभिन्न स्तरों पर इसकी अलग-अलग व्याख्याएं की जाने लगीं।
बाद में पंजाब सरकार ने इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि पुलिस कमिश्नर के बयान का गलत अर्थ निकाला गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी ने यह नहीं कहा था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों का आतंकी मॉड्यूल से कोई संबंध था। सरकार के अनुसार बयान के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से प्रस्तुत किए जाने के कारण भ्रम की स्थिति बनी। इसके बावजूद कुछ दिनों बाद ही गुरप्रीत सिंह भुल्लर का तबादला होने से इस फैसले की टाइमिंग को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि सरकार की ओर से यह नहीं कहा गया कि तबादला किसी बयान या विवाद के कारण किया गया है।
गुरप्रीत सिंह भुल्लर पंजाब कैडर के वर्ष 2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव के दौरान वे लुधियाना और जालंधर सहित कई महत्वपूर्ण जिलों में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके हैं। अमृतसर में पुलिस कमिश्नर के रूप में उन्होंने कई बड़े अभियानों का नेतृत्व किया। वर्ष 2016 में अपनी घोषित संपत्ति को लेकर भी वे चर्चा में आए थे। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में उन्हें देश के सबसे संपन्न आईपीएस अधिकारियों में शामिल बताया गया था। उनके प्रशासनिक अनुभव और हालिया कार्रवाई के कारण उनका तबादला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी नेताओं ने भी सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि जिस अधिकारी ने हाल ही में एक बड़े आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया, उसका अचानक तबादला कई सवाल खड़े करता है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी इस फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। दूसरी ओर सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि अधिकारियों के तबादले प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
फिलहाल हरमन बीर सिंह गिल ने अमृतसर पुलिस कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है। उनसे सीमावर्ती जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा चल रही जांच को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जा रही है। वहीं गुरप्रीत सिंह भुल्लर के तबादले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक यही कहा गया है कि यह एक नियमित प्रशासनिक निर्णय है और इसे किसी अन्य घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
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