पंजाब

SGPC के पूर्व अध्यक्ष हरिंदर सिंह तरनतारन का निधन, उम्र 90 साल

Ratna Netam
8 May 2026 12:25 PM IST
SGPC के पूर्व अध्यक्ष हरिंदर सिंह तरनतारन का निधन, उम्र 90 साल
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Punjab.पंजाब: सिख धर्म की प्रमुख संस्था, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष हरिंदर सिंह तरनतारन का 90 वर्ष की उम्र में ब्रैम्पटन, कनाडा में निधन हो गया। उनका निधन लंबे समय से चली आ रही बीमारियों के बाद हुआ। यह खबर धार्मिक और राजनीतिक समुदाय में गहरे शोक का कारण बनी है।
हरिंदर सिंह तरनतारन का जन्म पंजाब के तरनतारन जिले में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय सिख समाज की सेवा में समर्पित किया। SGPC में उनके योगदान को याद करते हुए कई वरिष्ठ धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनका नाम सिख धार्मिक संस्थाओं के विकास और गुरुद्वारों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले नेताओं में लिया जाता रहा है।
SGPC में कार्यकाल के दौरान हरिंदर सिंह तरनतारन ने गुरुद्वारों के रखरखाव, धार्मिक समारोहों के आयोजन और सिख समाज के कल्याण के लिए कई योजनाओं को लागू किया। उनके कार्यकाल के दौरान गुरुद्वाराओं में पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने सिख युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ने के लिए विभिन्न शैक्षिक और सामाजिक कार्यक्रमों की भी शुरुआत की।
ब्रैम्पटन में उनके निधन की खबर मिलते ही सिख समाज में शोक की लहर फैल गई। कनाडा और भारत में उनके अनुयायी और सहयोगी सोशल मीडिया और स्थानीय समुदायों में उन्हें याद कर रहे हैं। SGPC ने भी आधिकारिक बयान जारी कर उनके योगदान को याद किया और उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की। बयान में कहा गया, "हरिंदर सिंह तरनतारन ने अपने जीवन को सिख धर्म और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।"
हरिंदर सिंह तरनतारन का जीवन केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं था। वे सामाजिक और राजनीतिक मामलों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने सिख समुदाय के उत्थान और पंजाब के सामाजिक मुद्दों पर खुलकर काम किया। उनके नेतृत्व में कई सामाजिक कल्याण योजनाओं का शुभारंभ हुआ, जिसने समाज के कमजोर वर्गों को लाभ पहुंचाया।
धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि हरिंदर सिंह तरनतारन का निधन सिख समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका जीवन एक उदाहरण है कि किस तरह धार्मिक संस्थाओं में नेतृत्व के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनके कार्यों और आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों द्वारा याद किया जाएगा।
हरिंदर सिंह तरनतारन के परिवार में पत्नी, बच्चे और पोते-पोतियां हैं। उनके निकटतम सहयोगियों और समाजिक नेताओं ने उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए ब्रैम्पटन आने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं भारत में भी कई धार्मिक संस्थाएं और गुरुद्वारा समितियां उनके लिए विशेष प्रार्थना सभाओं और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन कर रही हैं।
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