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चंडीगढ़। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को हुई घटना की पांचवीं बरसी पर शनिवार को किसान संगठनों ने कैंडल मार्च निकालकर जान गंवाने वाले किसानों और पत्रकार को श्रद्धांजलि दी। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और किसान मजदूर मोर्चा से जुड़े संगठनों ने इस मौके पर न्याय की मांग दोहराई और मामले में कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग उठाई।चंडीगढ़ में किसान भवन से मटका चौक की ओर आयोजित कैंडल मार्च में पंजाब और हरियाणा के किसान-मजदूर संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में मोमबत्तियां लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने 2021 की घटना में जान गंवाने वालों को याद किया। किसान नेताओं ने कहा कि पांच साल बीतने के बावजूद इस घटना से जुड़े न्याय और पहले किए गए आश्वासनों के मुद्दे उनके लिए अभी भी महत्वपूर्ण हैं।एक प्रतिभागी ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि घटना में जान गंवाने वालों में युवा भी शामिल थे और कुछ परिवारों ने अपने इकलौते बेटों को खोया था। उन्होंने कहा कि किसान उन लोगों की याद का सम्मान करते हुए न्याय की मांग जारी रखेंगे।
पांच साल पहले क्या हुआ था?
3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसान और पत्रकार रमन कश्यप समेत कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। किसान उस समय केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन का हिस्सा थे। मामले की जांच के बाद आशीष मिश्रा समेत कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया और मामला अदालत में विचाराधीन है।पांचवीं बरसी पर किसान संगठनों ने चार किसानों और पत्रकार रमन कश्यप को विशेष रूप से याद किया। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी 'शहीद दिवस' के रूप में मनाने का आह्वान किया था। संगठन ने इस दिन से देशभर में ग्राम महापंचायतों के अभियान की शुरुआत करने की भी घोषणा की है।
कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग
किसान-मजदूर मोर्चा की प्रमुख मांगों में लखीमपुर खीरी मामले की न्यायिक प्रक्रिया को जल्द पूरा करना शामिल है। किसान संगठनों का कहना है कि मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए।संगठनों ने यह भी मांग की है कि 2021 में घटना के बाद सरकार और किसान नेताओं के बीच हुए समझौते तथा घोषित राहत उपायों को पूरी तरह लागू किया जाए। उस समय मृतक किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और घायलों को आर्थिक सहायता देने की घोषणाएं की गई थीं।किसान नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बरसी पर श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवारों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहना भी है।
पंजाब से भी पहुंचे किसान
कैंडल मार्च में हिस्सा लेने के लिए पंजाब के अलग-अलग इलाकों से किसान चंडीगढ़ पहुंचे। अमृतसर से किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब का एक जत्था शनिवार सुबह चंडीगढ़ के लिए रवाना हुआ था। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने इसकी जानकारी दी थी।मार्च के दौरान किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि लखीमपुर खीरी की घटना किसान आंदोलन के दौरान हुई उन घटनाओं में शामिल है, जिन्हें वे भूल नहीं सकते। प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां जलाकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी और न्याय की मांग के समर्थन में आवाज उठाई।
हरियाणा में भी हुए कार्यक्रम
लखीमपुर खीरी घटना की पांचवीं बरसी पर हरियाणा के कई स्थानों पर भी किसान संगठनों ने कार्यक्रम आयोजित किए। फतेहाबाद जिले के रतिया, कुलां चौक, अहरवां और भट्टू में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर प्रदर्शन किए गए।कुलां में किसान सभा कार्यकर्ताओं ने घटना में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी और मामले में न्याय की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि पांच साल बाद भी इस मुद्दे को लेकर उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है।
3 से 23 अक्टूबर तक ग्राम महापंचायतें
लखीमपुर खीरी की बरसी के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की है। SKM ने 3 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक देशभर के गांवों में ग्राम महापंचायतें आयोजित करने का आह्वान किया है। इन महापंचायतों में किसान आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।इसके अलावा 12 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल में संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय परिषद और आम सभा की बैठक प्रस्तावित है। इसमें संगठन की आगे की रणनीति और किसान आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों पर चर्चा की जाएगी। SKM ने 26 नवंबर से किसान आंदोलन को और तेज करने का भी आह्वान किया है।
न्याय मिलने तक आवाज उठाने की बात
कैंडल मार्च के दौरान किसान संगठनों ने कहा कि लखीमपुर खीरी में जान गंवाने वाले किसानों और पत्रकार की याद को केवल एक दिन की श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखा जाएगा। संगठनों का कहना है कि वे कानूनी जवाबदेही, पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और पहले किए गए सरकारी आश्वासनों को पूरा कराने की मांग उठाते रहेंगे।पांचवीं बरसी पर निकाला गया कैंडल मार्च एक तरफ मृतकों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम रहा, वहीं दूसरी तरफ किसान संगठनों ने इसके जरिए अपनी लंबित मांगों को फिर सामने रखा। अब किसान संगठनों की आगामी ग्राम महापंचायतों और 12 अक्टूबर को करनाल में होने वाली बैठक में आंदोलन की आगे की दिशा पर चर्चा होने वाली है।
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