पंजाब

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में मशीनों की खरीद की ईडी ने शुरू की जांच

Kavita2
9 Aug 2026 5:32 PM IST
बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में मशीनों की खरीद की ईडी ने शुरू की जांच
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फरीदकोट। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में पिछले तीन वर्षों के दौरान खरीदी गई मशीनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि इस अवधि में विश्वविद्यालय स्तर पर करीब 1,000 करोड़ रुपये की मशीनों और अन्य उपकरणों की खरीदारी की गई। इसी खरीद से जुड़े दस्तावेजों और लेन-देन की जांच ईडी की ओर से शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस मामले में पहले पंजाब विजिलेंस ब्यूरो भी जांच कर चुका है। हालांकि, विजिलेंस की ओर से की गई जांच की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। अब मामले में ईडी की जांच शुरू होने से विश्वविद्यालय में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुई बड़ी खरीद प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

तीन वर्षों की खरीद पर नजर

जांच का मुख्य केंद्र पिछले तीन वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय में खरीदी गई मशीनें और अन्य उपकरण बताए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए बड़ी संख्या में अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों की खरीद की जाती है। इस दौरान हुई खरीदारी की कुल राशि करीब 1,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ईडी की जांच में खरीद प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज, भुगतान, संबंधित कंपनियों और एजेंसियों के साथ हुए लेन-देन तथा खरीद की प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं को खंगाले जाने की संभावना है। जांच एजेंसी यह भी देख सकती है कि खरीद के लिए अपनाई गई प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

हालांकि, अभी तक जांच के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ दोष सिद्ध होने की बात सामने नहीं आई है। ईडी की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद प्रक्रिया में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई थी या नहीं।

विजिलेंस ब्यूरो भी कर चुका है जांच

इस मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो पहले ही जांच कर चुका है। विजिलेंस की जांच किन बिंदुओं पर केंद्रित थी और उसमें क्या निष्कर्ष सामने आए, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि विजिलेंस की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

अब ईडी द्वारा मामले की जांच शुरू किए जाने से पहले की विजिलेंस जांच और उसके निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और पहले हुई जांच में सामने आए तथ्यों को भी देख सकती है।

विजिलेंस की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने के कारण फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जांच में किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। ऐसे में ईडी की जांच से मामले से जुड़े कई पहलुओं के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

खरीद प्रक्रिया और भुगतान की जांच संभव

करीब 1,000 करोड़ रुपये की खरीदारी का मामला होने के कारण जांच में वित्तीय लेन-देन महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। ईडी खरीद से संबंधित भुगतान, कंपनियों को जारी रकम, बैंकिंग लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।

इसके अलावा मशीनों और उपकरणों की वास्तविक कीमत, उनकी खरीद के लिए अपनाई गई प्रक्रिया, निविदा और चयन प्रक्रिया तथा आपूर्ति से संबंधित दस्तावेजों का भी परीक्षण किया जा सकता है। यदि किसी खरीद में नियमों के उल्लंघन या वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है, तो जांच आगे संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंच सकती है।

हालांकि, जांच के शुरुआती चरण में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। एजेंसी द्वारा दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

स्वास्थ्य संस्थान में बड़ी खरीद

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज पंजाब का प्रमुख चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा संस्थान है। विश्वविद्यालय और उससे जुड़े संस्थानों में मरीजों के इलाज, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए विभिन्न प्रकार की मशीनों और उपकरणों की जरूरत होती है।

अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद में बड़ी रकम खर्च होती है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि इतनी बड़ी राशि की खरीद से जुड़े मामले में जांच शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।

रिपोर्ट सार्वजनिक होने का इंतजार

मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी जांच में क्या निष्कर्ष निकला था और क्या कोई अनियमितता सामने आई थी।

अब ईडी की जांच के बाद इस मामले में आगे की दिशा पर सबकी नजर है। जांच एजेंसी दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद संबंधित अधिकारियों या अन्य पक्षों से पूछताछ कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच से साफ होगी तस्वीर

फिलहाल बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में पिछले तीन वर्षों के दौरान हुई करीब 1,000 करोड़ रुपये की मशीनों और उपकरणों की खरीद जांच के केंद्र में है। पहले विजिलेंस ब्यूरो की जांच और अब ईडी की पड़ताल ने इस मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।

जांच का उद्देश्य खरीद प्रक्रिया, वित्तीय लेन-देन और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की वास्तविक स्थिति सामने लाना होगा। यदि जांच में कोई अनियमितता मिलती है तो संबंधित कानूनों के तहत आगे कार्रवाई हो सकती है। वहीं, यदि खरीद प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पाई जाती है तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

फिलहाल मामले में किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। ईडी की जांच और पहले की विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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