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Punjab बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के सबसे विवादित मुद्दों पर कोई बात नहीं की। इनमें 'बंदी सिखों' की रिहाई, नदियों के पानी का बंटवारा, चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपना, सतलुज-यमुना लिंक नहर, यमुना के पानी में पंजाब का हिस्सा, पंजाबी बोलने वाले इलाकों को राज्य में शामिल करना और करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलना जैसे मुद्दे शामिल थे।
शाह का भाषण ड्रग्स के मुद्दे पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि पार्टी ड्रग्स की समस्या को जनता के सामने उठाएगी। उन्होंने कहा, "बीजेपी पंजाब में ड्रग्स के मुद्दे पर वोट मांगेगी।" उन्होंने इस अभियान को सीमावर्ती राज्य में पार्टी का मुख्य चुनावी मुद्दा बताया। बीजेपी ने सबसे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में ड्रग्स को चुनावी मुद्दा बनाया था, जबकि उस समय वह शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन में थी और राज्य में SAD की सरकार थी। अब पार्टी ने इस मुद्दे को और ज़ोर-शोर से उठाया है।
SAD के साथ किसी भी गठबंधन पर उनकी चुप्पी भी उतनी ही ध्यान देने वाली थी। इसके अलावा, उन्होंने अपने पुराने सहयोगी की आलोचना करने से परहेज किया और सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का भी कोई ज़िक्र नहीं किया। दोनों पुराने सहयोगियों के बीच फिर से गठबंधन की अटकलें बनी हुई हैं, लेकिन शाह ने इस बारे में कोई संकेत नहीं दिया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक जानकारों के बीच अटकलें जारी हैं।
शाह ने ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए दो साल का समय भी तय किया। जानकारों का कहना है कि यह समय-सीमा एक सोची-समझी रणनीति लगती है, जो विरोधियों के पिछले वादों के नाकाम होने के बाद तय की गई है। कांग्रेस ने 2017 में सत्ता में आने के एक महीने के भीतर ड्रग्स खत्म करने का वादा किया था, जबकि आम आदमी पार्टी ने दावा किया था कि वह छह महीने के भीतर ड्रग्स के कारोबार की कमर तोड़ देगी।
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